NEET आंदोलन का घिनौना अंत: 22 छात्रों की मौत पर राजनीति करने वालों का फाइव स्टार होटल में नंगा नाच!
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चला हाई-प्रोफाइल आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया। केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों की भीड़ जंतर-मंतर से अपने-अपने घरों को लौट चुकी है। लेकिन इस आंदोलन के खत्म होते ही एक ऐसी घिनौनी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। जिन 22 मासूम छात्रों ने NEET परीक्षा में पेपर लीक और सिस्टम के भ्रष्टाचार से तंग आकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी, क्या उनकी मौत सिर्फ कुछ राजनीतिक महत्वाकांक्षी लोगों के लिए एक इवेंट मैनेजमेंट का जरिया थी?
NEET घोटाले के विरोध में बच्चों को न्याय दिलाने का दावा करने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के शीर्ष नेताओं का एक शर्मनाक वीडियो सामने आया है। मंत्री का इस्तीफा होते ही, मृत बच्चों को न्याय दिलाने की बातें दरकिनार कर दी गईं और CJP की कोर टीम दिल्ली के एक आलीशान फाइव स्टार होटल में डीजे की धुन पर जश्न मनाती नजर आई।
जश्न में डूबे प्रायोजक, सड़कों पर फंसे मासूम छात्र
वायरल वीडियो में CJP के प्रमुख चेहरे—सौरभ दास और आशुतोष रांका बॉलीवुड गानों पर जमकर थिरकते और हुल्लड़ मचाते दिख रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या इन्हें उन 22 मृत बच्चों की ज़रा भी फिक्र थी, जिनकी तस्वीरों को मंचों पर लगाकर इन्होंने 36 दिनों तक रोटियां सेकीं? तुम्हें जश्न ही मनाना था, तो कम से कम उन बच्चों को एक श्रद्धांजलि तो दे देते, लेकिन मंच खत्म होते ही उन बच्चों की तस्वीरों को भी वहीं फेंक दिया गया।
दूसरी ओर, दिपके, सौरभ और रांका के आह्वान पर देशभर से आए हजारों बेकसूर छात्रों का भविष्य अब और अधिक अंधकार में लटक गया है। बिहार से लेकर बंगाल तक, आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को लेकर सैकड़ों मासूम छात्रों पर पुलिस केस दर्ज हो चुके हैं और कई लड़के जेल में बंद हैं। NEET पेपर लीक से जो भविष्य बर्बाद हुआ सो हुआ, बचा-कुचा करियर CJP के इन नेताओं की राजनीति की वजह से तबाह हो गया। आज जब इन लड़कों को कानूनी मदद और आर्थिक सहारे की जरूरत है, तब आंदोलन के ये तथाकथित आका फाइव स्टार होटल के बंद कमरों में अय्याशी कर रहे हैं।
जुनैद को अकेले छोड़ा, गद्दारी की हदों को पार किया
CJP की इस कोर टीम पर सबसे बड़ा आरोप अपने ही साथियों को बीच राह में धोखा देने का लग रहा है। आंदोलन के पहले दिन से CJP के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने वाले कार्यकर्ता जुनैद—जिसने 36 दिनों तक जंतर-मंतर पर लोगों के खाने-पीने से लेकर रहने का इंतजाम संभाला—आज पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई का सामना अकेला कर रहा है। जब जुनैद पर कानूनी गाज गिर रही है, तब सौरभ दास और रांका उसे अकेला छोड़कर फाइव स्टार होटल की पार्टियों में डूबे हुए हैं।
लाखों रुपये का फंड कहाँ से आया? उठ रहे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद CJP की फंडिंग पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खुद को ‘बेरोजगार छात्र’ बताने वाले ये नेता 36 दिनों तक दिल्ली के दिल में इतना बड़ा आंदोलन चलाने, टेंट, लाउडस्पीकर, मीडिया कवरेज और खाने-पीने का खर्च उठाने का पैसा कहाँ से ला रहे थे? आंदोलन खत्म होते ही आलीशान होटल के महंगे कमरों का बिल किसने चुकाया?
अब यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि यह छात्रों का कोई स्वाभाविक आंदोलन नहीं था, बल्कि यह राजनीतिक पैसों और साजिशों पर खेला गया एक प्रायोजित खेल था। देश के छात्रों और अभिभावकों को ऐसे चेहरों को पहचानना होगा, जिन्होंने बेकसूर बच्चों की लाशों पर अपनी राजनीति की इमारत खड़ी करने की कोशिश की। देश ऐसे गद्दारों को कभी माफ नहीं करेगा।
