बॉम्बे हाईकोर्ट में E20 एथेनॉल प्रोग्राम को लेकर सुनवाई, जानें क्या है पूरा मामला
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के ड्रीम प्रोजेक्ट E20 एथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल (Ethanol Blending Programme) को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में अहम चर्चा हुई है। देश में एथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा देने और प्रदूषण कम करने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा E20 ईंधन नीति को तेजी से लागू किया जा रहा है।
क्या है E20 एथेनॉल प्रोग्राम? सरकार की योजना के तहत पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की कच्चे तेल (Crude Oil) पर निर्भरता को कम करना, विदेशी मुद्रा बचाना और वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में कटौती करना है। नितिन गडकरी लगातार हरित ईंधन (Green Fuel) और किसानों की आय बढ़ाने के लिए एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं।
अदालत में क्यों पहुंचा मामला? E20 एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर दायर याचिका में वाहनों के इंजन पर इसके प्रभाव, माइलेज में होने वाले बदलाव और पुराने वाहनों की अनुकूलता (Compatibility) से जुड़े सवाल उठाए गए थे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में संबंधित पक्षों की दलीलें सुनीं और सरकार की नीतियों तथा तकनीकी मानकों का संज्ञान लिया।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है यह कदम?
- प्रदूषण में कमी: पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन घटता है।
- किसानों को फायदा: एथेनॉल का उत्पादन गन्ना, मक्का और अन्य खाद्यान्नों से होता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय मिलती है।
- इंपोर्ट बिल में राहत: भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ने से अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
सरकार का लक्ष्य 2025-26 तक देश भर में E20 पेट्रोल की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करना है, जिससे हरित और आत्मनिर्भर भारत के सपने को गति मिल सके।
