अपने संकटों से बेखबर पाकिस्तान: भारत में ‘तख्तापलट’ का झूठा नैरेटिव गढ़ने में जुटा मीडिया
पाकिस्तान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे गंभीर आंतरिक संकटों से गुजर रहा है। एक तरफ जहां बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के हनन को लेकर विरोध के स्वर तेज हो चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) की जनता भीषण महंगाई और मौलिक अधिकारों की कमी को लेकर सड़कों पर है। देश आर्थिक रूप से बदहाली के कगार पर खड़ा है, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तानी हुक्मरानों और वहां के मीडिया तंत्र का पूरा ध्यान भारत के आंतरिक मामलों पर केंद्रित है।
हाल ही में भारत में हुए सीजेपी (CJP) के प्रदर्शनों को पाकिस्तानी मीडिया अपने प्राइम-टाइम शोज़ और प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जिस तरह भुनाने की कोशिश कर रहा है, वह बेहद चौंकाने वाला है।
प्राइम-टाइम शोज़ में फैलाया जा रहा भ्रामक एजेंडा
बलूचिस्तान के दमन और PoK के असंतोष की खबरों को पूरी तरह दरकिनार कर पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल दिन-रात भारत के आंतरिक प्रदर्शनों का प्रसारण कर रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया के एंकर्स और तथाकथित राजनीतिक विश्लेषक इन प्रदर्शनों को इस तरह पेश कर रहे हैं, मानो भारत में कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर या सत्ता परिवर्तन होने वाला है। टीवी डिबेट्स का मुख्य उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र में अस्थिरता का माहौल दिखाना और वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाना बन चुका है।
अखबारों और चैनलों में एकतरफा कवरेज
पाकिस्तान के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों की कवरेज को देखा जाए, तो वहां एक खास तरह की पटकथा साफ नजर आती है। उदाहरण के तौर पर, पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्र ‘DAWN’ की रिपोर्टिंग का रुख पूरी तरह एकतरफा और सनसनीखेज है। अखबार ने अपनी सुर्खियों और थंबनेल्स के जरिए पाठकों को पहली ही नजर में भारत सरकार के खिलाफ भड़काने का प्रयास किया है।
DAWN की कुछ चर्चित सुर्खियां इस प्रकार हैं:
- “Under soaring pressure after ‘Cockroach’ movement protests, India’s education minister promises reforms, debate.”
- “India protests give opposition a rare opening against Modi.”


इसी तरह का एकतरफा और भ्रामक नैरेटिव ‘Geo News’ जैसे प्रमुख न्यूज़ नेटवर्क पर भी देखा जा रहा है। उनके यूट्यूब थंबनेल्स और उर्दू में प्रकाशित खबरों का लब्बोलुआब यही है कि भारत सरकार प्रदर्शनकारियों के आगे पूरी तरह झुक गई है। “पुलिस लाठीचार्ज”, “राहुल गांधी का संघर्ष” और “प्रदर्शन में वामपंथियों की एंट्री” जैसी खबरों को अत्यधिक तूल देकर पेश किया जा रहा है, ताकि पाकिस्तान की आम जनता को यह भरोसा दिलाया जा सके कि भारत में किसी भी वक्त तख्तापलट हो सकता है।
फर्जी खबरों और प्रोपेगैंडा का पुराना इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तानी मीडिया ने भारत के आंतरिक मामलों में ऐसा भ्रामक रुख अपनाया हो। इससे पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी पाकिस्तानी मीडिया पोर्टलों ने कई झूठी और मनगढ़ंत खबरें प्रकाशित की थीं। उस समय भी पाकिस्तान की झूठी जीत का दावा किया गया था, जबकि असलियत यह थी कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी नाकामी का सामना करना पड़ा था।
वर्तमान समय में भी यह पूरा मीडिया नेटवर्क भारत के आंतरिक लोकतांत्रिक मुद्दों का फायदा उठाकर भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक नकारात्मक भूमिका में दिखाने की नाकाम कोशिश कर रहा है।
निष्कर्ष: अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत
पाकिस्तान का यह रुख उसके दोहरे रवैये को पूरी तरह उजागर करता है। जो देश खुद गंभीर आर्थिक कंगाली और जनता के भारी आक्रोश से जूझ रहा हो, उसका मीडिया पड़ोसी देश के लोकतांत्रिक प्रदर्शनों पर काल्पनिक कहानियां गढ़ रहा है। पाकिस्तानी हुक्मरानों और मीडिया को दूसरों की आलोचना करने या भारत में तख्तापलट के सपने देखने से पहले अपने देश के हालात सुधारने और अपने गिरेबान में झांकने की सख्त जरूरत है।
