NEET पर सियासत के बीच कर्नाटक में ‘Cash for Job’ का मुद्दा: क्या बिक रही थीं सरकारी नौकरियां?
एक तरफ जहाँ देशभर में NEET पेपर लीक को लेकर राजनीति गरमाई हुई है और विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को घेरते हुए युवाओं के भविष्य का मुद्दा उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार की ओर से भी कड़े कदम उठाने की घोषणाएं की गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात वीडियो संदेश जारी कर फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन और Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act के तहत कठोर कानून बनाने की बात कही। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच सोनम वांगचुक भी अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर चुके हैं।
लेकिन इसी गहमागहमी के बीच, कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी भर्ती व्यवस्था और पारदर्शिता पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
KPSC Veterinary Officer भर्ती: ₹80 लाख में नौकरी का आरोप
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) ने हाल ही में राज्य के सरकारी पशु चिकित्सालयों में 400 Veterinary Officer (पशु चिकित्सा अधिकारी) पदों पर भर्ती निकाली थी। इस परीक्षा का आयोजन 8 जनवरी को हुआ और इसके परिणाम 17 जुलाई को घोषित किए गए। हालांकि, रिजल्ट सामने आते ही पूरी चयन प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों के बीच भारी असंतोष और विवाद खड़ा हो गया। उम्मीदवारों का आरोप है कि यह भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई और इसमें बड़े पैमाने पर धांधली की गई है। उनका दावा है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अवैध तरीकों से प्रभावित हुआ।
‘डील’ का तरीका और सनसनीखेज दावे
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप बिचौलियों के माध्यम से सामने आया है। उम्मीदवारों के अनुसार, रफ़ी और विनोद नाम के दो बिचौलियों ने उनसे संपर्क किया और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ₹80 लाख की भारी भरकम रकम मांगी। इस डील का तरीका यह तय किया गया था कि ₹40 लाख एडवांस के तौर पर दिए जाएंगे और बाकी के ₹40 लाख नौकरी पक्की होने के बाद। अभ्यर्थियों को भरोसे में लेने के लिए बिचौलियों ने एडवांस के बदले सुरक्षा के तौर पर पोस्ट-डेटेड चेक देने का भी आश्वासन दिया।
मामले का खुलासा करने वाले एक अभ्यर्थी का दावा है कि उसने शुरुआत में ₹2 लाख UPI के ज़रिए ट्रांसफर किए और फिर बिचौलियों से मुलाकात की। अभ्यर्थी का सनसनीखेज आरोप है कि बातचीत के दौरान उसकी बात KPSC के शीर्ष स्तर के अधिकारियों से कराई गई, जिन्होंने सौदा पक्का होने पर नौकरी मिलने की गारंटी दी। जब अभ्यर्थी ने रकम कम करने की बात की, तो उसे साफ़ मना कर दिया गया।
पुलिस शिकायत और आयोग का विवादों से नाता
सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े वीडियो और ऑडियो वायरल होने के बाद विवाद और गहरा गया। इसके बाद 50 से अधिक उम्मीदवार बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन पहुंचे और पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई। अभ्यर्थियों की मांग है कि यदि जांच में गड़बड़ी पाई जाती है, तो परीक्षा को तुरंत रद्द कर नए सिरे से आयोजित किया जाए।
कर्नाटक लोक सेवा आयोग का विवादों से पहले भी पुराना नाता रहा है। हाल ही में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहुकार को निलंबित किया गया था। उन पर अपनी बेटियों की भर्ती के दौरान फर्जी आय व जाति प्रमाणपत्र का लाभ दिलाने और हितों के टकराव की जानकारी छिपाने के आरोप लगे थे।
विपक्ष का हमला और उठते राजनीतिक सवाल
मामले के तूल पकड़ते ही कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता चलावडी नारायणस्वामी ने “कैश फॉर जॉब” के इस कथित मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला है।
हालाँकि, खबर लिखे जाने तक इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होनी बाकी है और पुलिस जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। लेकिन इस घटनाक्रम ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। जो दल राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर सवाल उठा रहे हैं, उनके अपने शासित राज्य में ऐसी अनियमितताओं के आरोप लगना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह आवश्यक है कि राजनीति से परे जाकर ऐसी सभी भर्तियों की पारदर्शी जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
