जंतर-मंतर प्रदर्शन में विदेशी फंडिंग के दावों ने बढ़ाई चिंता, आखिर कौन चला रहा है पूरा खेल?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन को लेकर अब एक नया और गंभीर दावा सामने आया है। सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह आरोप लगाया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों के लिए बड़े पैमाने पर भोजन और अन्य व्यवस्थाओं की फंडिंग विदेशों से की जा रही है। इन दावों के सामने आने के बाद आंदोलन की प्रकृति और उसके पीछे मौजूद संभावित नेटवर्क को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
सैकड़ों फूड डिलीवरी और हजारों खाने के पैकेट
दावों के अनुसार, प्रदर्शन स्थल पर कई दिनों तक लगातार बड़ी संख्या में फूड डिलीवरी होती रही। बताया जा रहा है कि प्रतिदिन सैकड़ों डिलीवरी पार्टनर जंतर-मंतर पहुंच रहे थे और हजारों भोजन के पैकेट प्रदर्शनकारियों के लिए मंगाए जा रहे थे। सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो में अतिरिक्त भोजन सड़कों पर पड़ा हुआ भी दिखाई देता है, जिसके आधार पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में भोजन की आवश्यकता आखिर क्यों थी।
विदेशों से फंडिंग के लगाए जा रहे आरोप
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर दावा यह किया जा रहा है कि भोजन के लिए ऑनलाइन ऑर्डर दुबई, कतर, बांग्लादेश, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों से दिए गए। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि दुबई में मौजूद एक व्यक्ति ने एक ही दिन में कई बार हजारों भोजन के ऑर्डर बुक किए। यदि ऐसे दावों की पुष्टि होती है, तो यह केवल एक प्रदर्शन का मामला नहीं रहेगा, बल्कि यह विदेशी फंडिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है।
क्या आंदोलन को लंबा खींचने की थी रणनीति?
आलोचकों का कहना है कि यदि प्रदर्शनकारियों को लगातार मुफ्त भोजन, पानी और अन्य सुविधाएं मिलती रहें, तो आंदोलन को लंबे समय तक बनाए रखना आसान हो जाता है। इसी आधार पर कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह केवल छात्रों की मदद थी या भीड़ को लगातार मौके पर बनाए रखने की सुनियोजित रणनीति। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी बहस
विदेशी फंडिंग के इन दावों के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है। एक पक्ष इसे भारत को अस्थिर करने की कथित अंतरराष्ट्रीय साजिश बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इन आरोपों के समर्थन में ठोस और आधिकारिक सबूत सार्वजनिक किए जाने की मांग कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी आंदोलन में विदेशी धन का इस्तेमाल हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
