जंतर-मंतर प्रदर्शन में मुफ्त खाना बांटने वाला मोहम्मद जुनैद कौन? सोशल मीडिया पर वायरल दावों के बाद उठे कई सवाल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान मुफ्त भोजन और पानी बांटने वाले मोहम्मद जुनैद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में वह प्रदर्शनकारियों के बीच सक्रिय दिखाई देता है। इसके बाद सोशल मीडिया पर उसकी पहचान, पृष्ठभूमि और कथित गतिविधियों को लेकर कई तरह के दावे किए जाने लगे, जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया।
गाजियाबाद के नाहल गांव से जुड़ने का दावा
सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी के अनुसार, मोहम्मद जुनैद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के नाहल गांव का रहने वाला बताया जा रहा है। यह वही गांव है, जो मई 2025 में पुलिस टीम पर हुए हमले के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। उस घटना में पुलिस पर कथित तौर पर पथराव और फायरिंग की गई थी, जिसमें कांस्टेबल सौरभ सिंह की गोली लगने से मौत हो गई थी। हालांकि, केवल किसी गांव से संबंध होना किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी सिद्ध नहीं करता। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत भूमिका का निर्धारण जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होता है।
आतंकी संगठन से कथित संबंधों को लेकर दावे
सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया जा रहा है कि मार्च 2026 में गाजियाबाद पुलिस ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा फैलाने और देशविरोधी गतिविधियों के आरोप में जिन लोगों को गिरफ्तार किया था, उनमें मोहम्मद जुनैद का नाम भी शामिल था। यदि ऐसे दावों की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी विषय बन सकता है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोप तब तक आरोप ही माने जाते हैं, जब तक न्यायिक प्रक्रिया के तहत वे सिद्ध न हो जाएं।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी चर्चा
सोशल मीडिया पर साझा किए गए कुछ स्क्रीनशॉट्स के आधार पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि जुनैद ने हमास के नेताओं के प्रति सहानुभूति जताने वाली पोस्ट साझा की थीं। इसके अलावा, कुछ राजनीतिक नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें और संबंधों को लेकर भी विभिन्न तरह के दावे किए जा रहे हैं। इन पोस्ट और तस्वीरों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और इनके आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक जांच का इंतजार किया जाना चाहिए।
आंदोलन के दौरान खर्च को लेकर उठ रहे सवाल
जंतर-मंतर पर कई दिनों तक प्रदर्शनकारियों के लिए मुफ्त भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सामान उपलब्ध कराया गया। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहे हैं कि इन व्यवस्थाओं का खर्च किसने उठाया और धन का स्रोत क्या था। फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं है। यदि किसी प्रकार की अवैध फंडिंग या बाहरी आर्थिक सहायता की आशंका है, तो उसकी जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जानी चाहिए।
पहले भी आंदोलनों में सक्रिय रहने के दावे
कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि मोहम्मद जुनैद इससे पहले किसान आंदोलन के दौरान भी सक्रिय दिखाई दिया था। इन दावों के बाद यह बहस छिड़ गई है कि क्या अलग-अलग आंदोलनों में कुछ समान चेहरे लगातार मौजूद रहते हैं या यह महज संयोग है।
