रेलवे के सैलून कोच में रुद्राभिषेक पर विवाद: फैक्ट चेकर ज़ुबैर ने फैलाया अधूरा ज्ञान, रेलवे ने दी सफाई
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ट्रेन की एक कोच में हो रही पूजा… सोशल मीडिया पर वायरल होता एक वीडियो… और फिर शुरू हो गई बहस। वीडियो सामने आते ही कई लोगों ने सवाल उठाए। इसी बीच फैक्ट-चेकर मोहम्मद ज़ुबैर ने भी इस मामले पर ट्वीट किया और रेलवे से जवाब मांगा। लेकिन रेलवे के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद इस पूरे विवाद ने नया मोड़ ले लिया।
क्या था मोहम्मद ज़ुबैर का दावा?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ट्रेन की एक कोच के भीतर धार्मिक अनुष्ठान और रुद्राभिषेक होता दिखाई दे रहा था। वीडियो सामने आने के बाद मोहम्मद ज़ुबैर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेल मंत्रालय को टैग करते हुए पूछा:
“Hello @AshwiniVaishnaw, was this approved by @RailMinIndia? If so, what is the procedure?”
इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज़ हो गई और कई लोगों ने रेलवे की व्यवस्था पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
रेलवे ने क्या दिया जवाब?
विवाद बढ़ने के बाद भारतीय रेलवे ने स्पष्ट किया कि जिस कोच में पूजा की जा रही थी, वह सामान्य यात्री कोच नहीं बल्कि प्राइवेट सैलून कोच (Saloon Car) था।
रेलवे के अनुसार:
- यह एक निजी रूप से बुक किया गया सैलून कोच था।
- पूजा से किसी अन्य यात्री को कोई असुविधा नहीं हुई।
- किसी भी रेलवे नियम का उल्लंघन नहीं किया गया।
- अनुष्ठान के दौरान आग का उपयोग नहीं किया गया।
रेलवे ने स्पष्ट किया कि पूरी गतिविधि निजी बुकिंग वाले कोच के भीतर हुई थी।
क्या होता है Saloon Car?
रेलवे का Saloon Car एक विशेष निजी कोच होता है, जिसे निर्धारित शुल्क देकर बुक कराया जा सकता है।
इस तरह के कोच में सामान्य कोचों की तुलना में अधिक सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं और यह निजी उपयोग के लिए आरक्षित रहता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस तरह के सैलून कोच की बुकिंग पर लाखों रुपये तक का खर्च आ सकता है।

सोशल मीडिया पर शुरू हुई नई बहस
रेलवे का जवाब आने के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं।
एक पक्ष का कहना है कि यदि गतिविधि पूरी तरह निजी बुकिंग वाले कोच में हुई और किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ, तो विवाद की कोई आवश्यकता नहीं थी।
दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े ऐसे मामलों पर सवाल पूछना उचित है और रेलवे का स्पष्टीकरण सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई।
रेलवे का रुख स्पष्ट
फिलहाल रेलवे ने साफ कर दिया है कि यह घटना किसी सामान्य या आरक्षित यात्री कोच में नहीं हुई थी, बल्कि निजी तौर पर बुक किए गए सैलून कोच में हुई थी। रेलवे का कहना है कि न तो किसी नियम का उल्लंघन हुआ और न ही अन्य यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा हुई। मगर ये चीज़ें फैक्ट-चेकिंग के नाम पर दलाली करने वाले मोहम्मद ज़ुबैर को नहीं दिखती। उसे हर जगह सिर्फ़ और सिर्फ़ एंटी-सनातन एंगल दिखता है।
