उज्बेकिस्तान में केरल की हिंदू मेडिकल छात्रा की बेरहमी से हत्या; धर्म परिवर्तन से इनकार करने पर क्लासमेट पर लगा जान लेने का आरोप

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विदेश में पढ़ाई कर रही केरल की एक 21 वर्षीय हिंदू मेडिकल छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में बेरहमी से हत्या कर दी गई है। मृतका की पहचान सांवरिया बसंत के रूप में हुई है, जो उज्बेकिस्तान के बुखारा स्टेट मेडिकल इंस्टीट्यूट में फर्स्ट ईयर की पढ़ाई कर रही थी। मृतका के परिजनों ने उसके ही सहपाठी (क्लासमेट) सदरुल अनम पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने और इनकार करने पर हत्या करने का सीधा और गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है।

दोस्ती के मुखौटे में छिपा था ‘जिहादी हैवान’ !

यह घटना किसी फिल्म की काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि सात समंदर पार घटित हुई एक खौफनाक और सच्ची घटना है। यह खबर आज हर उस सनातनी माता-पिता के भीतर अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक गहरा डर पैदा करती है, जिनके बच्चे सेक्युलरिज्म के नाम पर दूसरों के घरों में दावतें खा रहे हैं या अनजान लोगों को अपना दोस्त बना रहे हैं।

परिजनों के मुताबिक, सांवरिया जिसे अपना क्लासमेट और दोस्त समझ रही थी, वह वास्तव में दोस्ती के भेष में एक कट्टरपंथी साजिश रच रहा था। आरोप है कि आरोपी सदरुल अनम लंबे समय से सांवरिया पर अपनी संस्कृति और सनातन धर्म को छोड़कर इस्लाम कबूल करने का गंदा मानसिक दबाव बना रहा था। जब सांवरिया ने इस जिहादी दबाव के आगे झुकने से साफ मना कर दिया, तो आरोपी ने उसकी बेरहमी से हत्या कर दी।

केरल से उज्बेकिस्तान तक शिकार का पीछा

इस जानलेवा हमले और हत्या के आरोप में उज्बेकिस्तान पुलिस ने 22 वर्षीय सदरुल अनम को गिरफ्तार कर लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी सदरुल भी केरल के मलप्पुरम जिले का ही रहने वाला है। परिजनों का कहना है कि एक गिद्ध की तरह यह हैवान केरल से लेकर उज्बेकिस्तान तक पीड़िता का पीछा कर रहा था। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उज्बेकिस्तान की पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

इस घटना ने एक बार फिर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर 22 साल के पढ़ रहे लड़कों के दिमाग में गैर-मजहबी लड़कियों के खिलाफ इतना जहर भरता कौन है? इसके पीछे वही कट्टरपंथी सोच काम कर रही है, जो मानती है कि पहले लड़कियों को जाल में फंसाओ, उनका धर्म बदलो और यदि वे न मानें, तो उनका वजूद ही मिटा दो।

‘द केरल स्टोरी’ का खौफनाक पैटर्न और सरकारी आंकड़े

यदि आपने फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ देखी होगी, तो आपको अंदाजा होगा कि यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक तय पैटर्न है। एक खास समुदाय के लड़के पहले हिंदू लड़कियों से दोस्ती करते हैं, प्रोग्रेसिव और लिबरल होने का नाटक करते हैं, और उन्हें विदेश में पढ़ाई व झूठी आज़ादी का लालच देते हैं। परिवार से दूर होते ही लड़कियों पर बुर्का पहनने और धर्म बदलने का दबाव बनाया जाता है।

यह कोई प्रोपेगैंडा या हवा-हवाई बात नहीं है, बल्कि सरकारी आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं। साल 2010 में केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने खुद विधानसभा में एक आधिकारिक रिपोर्ट के संदर्भ में स्वीकार किया था कि राज्य में बड़े पैमाने पर युवतियों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। अगर उस दौर के आंकड़ों की रफ्तार को देखें, तो हर साल हजारों लड़कियों के कन्वर्जन का यह खौफनाक गणित पिछले 10 से 15 सालों में 30 से 32 हजार के आंकड़े को पार कर जाता है। ये आंकड़े बताते हैं कि ‘लव जिहाद’ की यह कड़वी सच्चाई कितनी डरावनी है।

लिबरल गैंग का नकाब उतरा; अब जागने का वक्त

जब भी समाज को आईना दिखाने वाली फिल्में आती हैं, तो देश का सो-कॉल्ड ‘लिबरल गैंग’ इसे प्रोपेगैंडा कहकर खारिज करने की कोशिश करता है। लेकिन उज्बेकिस्तान में सांवरिया बसंत की इस दर्दनाक हत्या ने इस पूरे गैंग के सेक्युलरिज्म के झूठे नकाब को नोच कर रख दिया है। सदरुल अनम जैसे लड़के हमारे और आपके समाज के बीच ही खुलेआम घूम रहे हैं।

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