उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म, 452 मदरसों की सरकारी ग्रांट बंद ; धामी सरकार ने लागू की नई शिक्षा व्यवस्था

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सोशल मीडिया पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वजह है राज्य सरकार का मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर लिया गया बड़ा फैसला। धामी सरकार ने मदरसा बोर्ड की व्यवस्था खत्म कर दी है और साथ ही सरकारी अनुदान को लेकर भी बड़ा बदलाव किया है।
उत्तराखंड सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव करते हुए ‘अरेबिया मदरसों को अनुदान’ वाली बजट मद को वित्तीय वर्ष 2027-28 से पूरी तरह समाप्त करने का फैसला लिया है। इसके बाद राज्य के 452 पंजीकृत मदरसों को सरकारी अनुदान नहीं मिलेगा।

मदरसा बोर्ड की जगह बनेगा नया शिक्षा प्राधिकरण

राज्य सरकार ने पुराने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया है। इसके स्थान पर 1 जुलाई 2026 से ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन किया गया है।

नई व्यवस्था के तहत राज्य के सभी मदरसों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से संबद्ध होना अनिवार्य होगा। परिषद से संबद्धता मिलने के बाद ही मदरसों को नई मान्यता दी जाएगी।

अब आधुनिक विषय पढ़ाना होगा अनिवार्य

नई शिक्षा व्यवस्था के तहत मदरसों में केवल धार्मिक शिक्षा पर्याप्त नहीं होगी।

सरकार ने विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, कंप्यूटर शिक्षा और अन्य आधुनिक विषयों को पढ़ाना अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही छात्रों को राज्य शिक्षा बोर्ड का वैध प्रमाणपत्र मिलेगा, जिससे वे आगे की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग ले सकेंगे।

सरकार ने क्या बताया वजह?

उत्तराखंड सरकार का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप लिया गया है।

सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, पारदर्शिता लाना और छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है। धार्मिक शिक्षा जारी रहेगी, लेकिन आधुनिक पाठ्यक्रम को अपनाना अनिवार्य होगा।

सीएम धामी ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस फैसले पर कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में चल रही विभाजनकारी शिक्षा व्यवस्था को समाप्त किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिसमें सभी छात्रों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।

अवैध मदरसों पर भी कार्रवाई तेज

सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज कर दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी शैक्षणिक संस्थानों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। दूसरी ओर, कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी है और मामले को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया है। हालांकि राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने फैसले पर कायम है और नई शिक्षा व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

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