जंतर-मंतर पर बेनकाब हुआ ‘गंदा गठबंधन’: NEET आंदोलन के नाम पर देश के खिलाफ बड़ी साजिश, आतिशी और अभिजीत दिपके का कनेक्शन आया सामने

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देश में छात्रों के हितों के नाम पर चल रहे जिस प्रदर्शन को आम जनता एक सामान्य आंदोलन समझ रही है, उसकी परतें अब खुलने लगी हैं। जंतर-मंतर से आई हालिया तस्वीरों ने यह साफ कर दिया है कि यह युवाओं के भविष्य की चिंता में किया गया कोई स्वतंत्र आंदोलन नहीं, बल्कि देश के खिलाफ रची जा रही एक गहरी और सुनियोजित राजनीतिक साजिश है।

इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य चेहरा बनकर उभरे अभिजीत दिपके और कथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की हकीकत अब पूरी तरह देश के सामने आ चुकी है। दरअसल, इन सब के पीछे कोई छात्र नेता नहीं, बल्कि एक ऐसा राजनीतिक नेतृत्व है जो अपनी खोई हुई जमीन तलाशने के लिए देश का माहौल खराब करने पर उतारू है।

आतिशी का जंतर-मंतर पहुंचना महज संयोग नहीं

मामले में मोड़ तब आया जब दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ नेता आतिशी अचानक प्रदर्शन स्थल पर पहुंच गईं। आतिशी ने वहां पहुंचकर न सिर्फ प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया, बल्कि अभिजीत दिपके और लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से भी लंबी मुलाकात की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कोई सामान्य मुलाकात नहीं है। इस क्रोनोलॉजी और गठबंधन के पीछे का मकसद भारत को पड़ोसी देशों की तरह हिंसा की आग में झोंकने का एक खतरनाक टूलकिट प्लान प्रतीत होता है।

‘आम आदमी पार्टी’ की बी-टीम होने का आरोप

कथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत से ही इस पर स्वतंत्र संगठन न होने के आरोप लगते रहे हैं। कयास लगाए जा रहे थे कि यह सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी की एक ‘बी-टीम’ या एजेंट विंग के रूप में काम कर रही है। अभिजीत दिपके, जो अब तक खुद को एक निष्पक्ष चेहरा साबित करने की कोशिश कर रहे थे, आज की तस्वीरों के बाद आम आदमी पार्टी के एक मोहरे के रूप में बेनकाब हो गए हैं, जिन्हें युवाओं के बीच खास एजेंडे के तहत प्लांट किया गया था।

चीफ जस्टिस की टिप्पणी को बनाया बहाना?

सूत्रों की मानें तो आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कुछ समय पहले ही देश के ‘जेन-ज़ी’ (Gen-Z) छात्रों को सड़कों पर आने के लिए उकसाने की कोशिश की थी। लेकिन जब दिल्ली की राजनीति में लगातार मिल रही विफलताओं के कारण देश के युवाओं ने उनके सीधे आह्वाहन को नकार दिया, तो एक नया पैंतरा बदला गया। चीफ जस्टिस की एक पुरानी टिप्पणी को ढाल बनाकर इस नए संगठन का ढांचा तैयार किया गया, जिसका असली मकसद NEET परीक्षा पर आवाज उठाना कम और सरकार व व्यवस्था के खिलाफ युवाओं में आक्रोश पैदा करना ज्यादा था।

विदेशी फंडिंग और बॉस्टन कनेक्शन का दावा

इस पूरे खेल के तार भारत के बाहर से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। दिल्ली और पंजाब में राजनीतिक रूप से कमजोर पड़ रही आम आदमी पार्टी को देश के युवा एक आसान टारगेट दिखाई दे रहे हैं। चर्चा है कि इस स्क्रिप्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए बॉस्टन (अमेरिका) में बैठे एक पुराने सहयोगी की मदद ली गई, जहां से पूरी टूलकिट और फंडिंग की रूपरेखा तैयार की गई। अभिजीत दिपके, जो कभी सीधे तौर पर पार्टी से जुड़े थे, अब परोक्ष रूप से शीर्ष नेतृत्व के इशारों पर काम कर रहे हैं।

छात्रों की भावनाओं से खिलवाड़ का आरोप

जंतर-मंतर के इस दौरे ने पर्दे के पीछे चल रही पूरी पटकथा को साफ कर दिया है। जेल से बाहर आने-जाने के कानूनी घटनाक्रमों के बीच, शीर्ष नेतृत्व अपने इन प्यादों का इस्तेमाल देश में अस्थिरता फैलाने के लिए कर रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या 23 लाख NEET परीक्षार्थियों के भविष्य और उनकी भावनाओं के साथ इस तरह का राजनीतिक स्टंट करना किसी पूर्व मुख्यमंत्री या जिम्मेदार दल को शोभा देता है? क्या यह देश के युवाओं की पीठ में छुरा घोंपने जैसा नहीं है?

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