झारखंड: हजारीबाग में नंगी तलवारें लहराकर ‘गजवा-ए-हिंद’ का नारा लगाने का वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा, कार्रवाई की मांग
झारखंड के हजारीबाग से एक बेहद चौंकाने वाला और विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में चार युवक सरेआम सड़क पर हाथ में नंगी तलवारें लहराते हुए आगे बढ़ रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस वीडियो के बैकग्राउंड में देश विरोधी एजेंडे और ‘गजवा-ए-हिंद’ से जुड़ा हुआ विवादित ऑडियो प्ले हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर नेटिजन्स का गुस्सा फूट पड़ा है और लोग आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर सरेआम चुनौती, बैकग्राउंड में बजा विवादित ऑडियो
यह वीडियो इंस्टाग्राम पर @RINKUKHAN71 नाम के एक यूजर हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में दिख रहे चारों युवकों के चेहरों पर कानून या पुलिस का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है। वे बेखौफ होकर सड़क पर धारदार तलवारें चमका रहे हैं। वहीं, वीडियो के बैकग्राउंड म्यूजिक में एक आवाज सुनाई दे रही है, जिसमें कहा जा रहा है—“जिंदगी की असल उड़ान अभी बाकी है, गजवा-ए-हिंद का इम्तेहान बाकी है।”
भारत को एक इस्लामिक राष्ट्र बनाने के हिंसक एजेंडे (गजवा-ए-हिंद) का इस तरह सरेआम सोशल मीडिया पर प्रचार करने और हथियारों का प्रदर्शन करने को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
युवाओं में बढ़ते कट्टरपंथ पर उठे सवाल
इस वीडियो के वायरल होने के बाद देश के जागरूक नागरिकों और विचारकों ने चिंता व्यक्त की है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर देश के युवाओं में इस कदर कट्टरपंथ और जिहादी मानसिकता क्यों और कैसे बढ़ती जा रही है? सोशल मीडिया पर परोसा जा रहा नफरती कंटेंट, भड़काऊ तकरीरें और मजहबी नारे किस तरह युवाओं को गुमराह कर रहे हैं, यह वीडियो उसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण है। भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और कानून व्यवस्था को इस तरह सोशल मीडिया के जरिए खुली चुनौती दिए जाने पर लोग गहरी नाराजगी जता रहे हैं।
हेमंत सोरेन सरकार और झारखंड पुलिस पर तुष्टिकरण के आरोप
मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड पुलिस को टैग करते हुए इन चारों युवकों को तत्काल सलाखों के पीछे भेजने की मांग की है। लोगों का कहना है कि समाज में नफरत फैलाने और देश की सुरक्षा को चुनौती देने वालों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जो एक मिसाल बने।
वहीं, दूसरी तरफ इस संवेदनशील मामले पर राज्य की जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन सरकार की चुप्पी को लेकर भी राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का आरोप है कि वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति के चलते सरकार और प्रशासन इस मामले में ढिलाई बरत रहे हैं। लोगों का कहना है कि जहां एक तरफ आम नागरिकों द्वारा सरकार की आलोचना करने पर पुलिस तुरंत मुस्तैद हो जाती है, वहीं देशविरोधी मानसिकता दिखाने वालों के खिलाफ अब तक कोई कड़ा रुख सामने नहीं आया है।
कठोर कार्रवाई की उठ रही मांग
जानकारों का मानना है कि इस तरह की मानसिकता को शुरुआत में ही कुचलना बेहद जरूरी है, अन्यथा यह ढिलाई देश के भविष्य और आंतरिक शांति के लिए घातक साबित हो सकती है। फिलहाल, जनता की नजरें झारखंड पुलिस और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या और कितनी जल्दी एक्शन लेते हैं।
