Opinion: ‘संसद मार्च’ का नया पैंतरा या दिल्ली को डिस्टर्ब करने का पुराना पैटर्न? CJP की टाइमिंग के पीछे का सच

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बीते दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के जिस एजेंडे को बेनकाब किया गया था, उसकी एक और नई कड़ी देश की राजधानी दिल्ली में देखने को मिलने वाली है। जनता के बीच अपनी साख खो चुके अभिजीत दिपके और उनके सहयोगी अब एक नए ड्रामे के तहत दिल्ली की शांति व्यवस्था को चुनौती देने की तैयारी में हैं। पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का दांव जब खाली गया, तो इस कथित एक्टिविस्ट गैंग ने अपनी नई रणनीति का पत्ता खोल दिया है।

इस विश्लेषण में हम CJP की इस पूरी इनसाइड स्टोरी और सोची-समझी क्रोनोलॉजी को डिकोड करेंगे। लेकिन उससे पहले इस पूरी मंडली के काम करने के तरीके को समझना जरूरी है। इस गैंग की सबसे बड़ी कमजोरी और जरूरत है ‘लाइमलाइट’। हर वक्त कैमरा और मीडिया का अटेंशन पाना इनकी पहली प्राथमिकता होती है। सुर्खियों में बने रहने के लिए स्टेज पर डांस करने से लेकर अनशन के ड्रामे तक, ये हर वो हथकंडा अपना सकते हैं जो इन्हें हेडलाइन्स में बनाए रखे। अब जब मुख्यधारा की मीडिया ने इन्हें पूरी तरह दरकिनार कर दिया है, तो तथाकथित साइंटिस्ट सोनम वांगचुक ने नया पासा फेंकते हुए ‘संसद मार्च’ का ऐलान कर दिया है।

मॉनसून सत्र और 20 जुलाई की ‘परफेक्ट टाइमिंग’

अगर आप ध्यान से देखें, तो इस पूरे प्रदर्शन की टाइमिंग बेहद चौंकाने वाली है। 20 जुलाई से देश की संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा है, और इन तथाकथित आंदोलनजीवियों ने बिल्कुल सोची-समझी रणनीति के तहत इसी तारीख को चुना है। यह एक दोहरा हमला है—एक तरफ सदन के भीतर कुछ माननीय सांसद हुड़दंग मचाकर कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास करेंगे, तो दूसरी तरफ सड़कों पर अराजकता फैलाने का जिम्मा इस ‘तुलचट्टा ब्रिगेड’ ने उठा लिया है। सोनम वांगचुक की ओर से लोगों को इस मार्च में शामिल होने का आह्वान किया जा रहा है और इसे हमेशा की तरह ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन’ का मुखौटा पहनाया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बताने वाले सोनम वांगचुक का यह नया रुख कई सवाल खड़े करता है।

सोशल मीडिया रील्स और ‘तानाशाही’ का नैरेटिव

सच्चाई यह है कि 20 जुलाई को दिल्ली की सड़कों पर एक पूर्व-निर्धारित स्क्रिप्ट (Pre-written Script) देखने को मिल सकती है। प्रदर्शनकारी संसद भवन की ओर बढ़ने का प्रयास करेंगे, जहां सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर दिल्ली पुलिस इन्हें रोकने की कोशिश करेगी। इसके बाद वहां धक्का-मुक्की और हंगामा होगा, पुलिस कानूनन इन्हें हिरासत में लेगी और तुरंत सोशल मीडिया पर सरकार और दिल्ली पुलिस को ‘तानाशाह’ घोषित करने का अभियान शुरू हो जाएगा।

दिल्ली की सड़कों पर जानबूझकर ऐसा तमाशा खड़ा किया जाए ताकि इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रील्स के जरिए एक खास नैरेटिव को प्रमोट किया जा सके। दूरदराज के इलाकों में बैठे आम नागरिकों को यह दिखाया जा सके कि कैसे एक ‘दमनकारी व्यवस्था’ शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की आवाज दबा रही है। यह देश की जनता के मन में व्यवस्था के प्रति द्वेष और अविश्वास पैदा करने की एक गहरी साजिश लगती है।

दिल्ली को ‘टारगेट’ करने का पुराना पैटर्न

यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है, बल्कि देश में अब यह एक तय पैटर्न बन चुका है। जब भी देश में संसद का कोई बड़ा सत्र शुरू होने वाला हो, कोई महत्वपूर्ण वैश्विक नेता या विदेशी मेहमान भारत आने वाला हो, या कोई बड़ा चुनाव नजदीक हो, यह पूरी मंडली अचानक सक्रिय हो जाती है।

अतीत गवाह है कि CJP की ही तर्ज पर किसानों के नाम पर दिल्ली में ‘टैक्टर मार्च’ की अनुमति मांगी गई थी। उस वक्त क्या हुआ, यह पूरी दुनिया ने देखा। देश की संप्रभुता के प्रतीक लाल किले पर जिस तरह की उपद्रवी तस्वीरें सामने आईं, उसने पूरे देश को शर्मसार किया था। क्या देश की राजधानी एक बार फिर उसी अराजकता के मुहाने पर खड़ी की जा रही है? यही कारण है कि सुरक्षा एजेंसियों और दिल्ली पुलिस को इस बार बेहद सतर्क, सख्त और मुस्तैद रहने की जरूरत है।

जंतर-मंतर पर JNU गैंग का कैंप

दावा यह किया जा रहा है कि यह पूरा विरोध प्रदर्शन NEET परीक्षा के मुद्दे पर छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। NEET की परीक्षा और उससे जुड़ी प्रक्रियाएं काफी पहले संपन्न हो चुकी हैं। यदि आप इनके धरना स्थल या प्रोटेस्ट साइट का जायजा लेंगे, तो वहां छात्रों के भविष्य या शिक्षा सुधारों से जुड़ी बातों के बजाय सिर्फ राजनीतिक और देश-विरोधी नैरेटिव सेट करने की कोशिशें दिखाई देंगी।

जंतर-मंतर पर इस वक्त पूरा का पूरा कथित ‘JNU गैंग’ कैंप लगाकर बैठा हुआ है। मासूम छात्रों के भविष्य और उनके कंधों का इस्तेमाल करके ये लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की फिराक में हैं। ऐसे संवेदनशील माहौल में, यदि प्रशासन इस तरह के तत्वों पर भरोसा करके उन्हें दिल्ली की मुख्य सड़कों पर मार्च करने की अनुमति देता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

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