क्या ईरान-अमेरिका के बीच खत्म हो गई शांति की उम्मीद? ट्रंप ने कहा- ‘मेरे लिए समझौता खत्म’, फिर तेज़ हुए हमले
क्या ईरान और अमेरिका के बीच शांति की उम्मीद अब पूरी तरह खत्म हो गई है? क्या एक बार फिर मध्य-पूर्व बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है? क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप ने अब साफ़ शब्दों में कह दिया है – “मेरे लिए ईरान के साथ हुआ समझौता खत्म हो चुका है।”
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम समझौता अब उनके लिए समाप्त हो चुका है। ट्रंप ने साफ़ कहा कि वह अब तेहरान के नेतृत्व के साथ आगे बातचीत नहीं करना चाहते। इतना ही नहीं, उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए तेहरान को “कैंसर” तक करार दिया।
ट्रंप ने कहा कि ईरान पर नए हमलों के बाद युद्धविराम अब खत्म हो चुका है, हालांकि बातचीत की संभावना पूरी तरह बंद नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “उनमें कुछ गड़बड़ है। वे बीमार हैं और गंदा खेल खेलते हैं।”
CENTCOM का बड़ा हमला, IRGC की 60 से ज्यादा नावें निशाने पर
तनाव बढ़ने के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। अमेरिकी कार्रवाई में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की 60 से अधिक छोटी नौकाओं को निशाना बनाया गया।
इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने के लिए दी गई विशेष छूट का लाइसेंस भी रद्द कर दिया। ट्रंप ने साफ़ कर दिया कि जब तक ईरान अपना रवैया नहीं बदलता, तब तक बातचीत का कोई मतलब नहीं है और वह अब तेहरान के नेतृत्व के साथ समय बर्बाद नहीं करना चाहते।
ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं
दूसरी ओर, ईरान का रुख भी नरम दिखाई नहीं दे रहा है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि यदि उन पर हमले जारी रहे, तो वे जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। जवाबी घटनाक्रम के बाद कुवैत ने भी अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।
तेल की कीमतों में उछाल, भारत पर भी असर
इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है, जिसका असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
पिछले दो सप्ताह से यह कहा जा रहा था कि हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। हार्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव कम होने के संकेत मिल रहे थे और कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट आने लगी थी। लेकिन इसी बीच ट्रंप के नए बयान और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने पूरे घटनाक्रम को फिर से बदल दिया।
क्या फिर बढ़ेगा मध्य-पूर्व का संकट?
जिस गतिरोध के शांत होने की उम्मीद जताई जा रही थी, उसी के बीच एक बार फिर सैन्य कार्रवाई ने हालात को और जटिल बना दिया है। अब सवाल यह है कि क्या यह तनाव एक बार फिर बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत पर कितना पड़ेगा।
भारत के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। हालांकि भारत पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा आपूर्ति के कई वैकल्पिक स्रोत विकसित करने की दिशा में काम करता रहा है।
वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर भी चर्चाएं तेज़ हैं। हाल के दिनों में जिस संभावित Islamabad Accord को लेकर उम्मीदें जताई जा रही थीं, उस पर भी अब अनिश्चितता के बादल मंडराते दिखाई दे रहे हैं।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर यह साफ़ कर दिया है कि अमेरिका और ईरान के रिश्तों में आई हर हलचल का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति, ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
