जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों में ‘शहीद’ बना अलगाववादी! विवादित किताब पर बड़ा एक्शन, 8 अधिकारी सस्पेंड

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मकबूल भट्ट (फाइल इमेज)

मान लीजिए आपके बच्चे किसी स्कूल में पढ़ते हैं और वहाँ जो किताबें आई हैं, उनमें ऐसे इंसान को ‘शहीद’ बताया गया हो जिस पर भारत विरोधी गतिविधियों के आरोप रहे हों, जिसने कश्मीर को भारत से अलग करने की मुहिम चलाई हो और जिसे भारत में प्रतिबंधित संगठन का संस्थापक माना जाता हो। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि ऐसी किताबें सरकारी स्कूलों तक पहुँची कैसे?

जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में रखी गई एक किताब के कुछ पन्नों ने ऐसा ही विवाद खड़ा कर दिया। मामला इतना बढ़ा कि 8 शिक्षा अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया, एक संविदा कर्मचारी की सेवाएँ समाप्त कर दी गईं और संबंधित लेखकों व प्रकाशकों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई।

आखिर किताब में ऐसा क्या लिखा था?

यह पूरा विवाद “Personalities and Legends of J&K” नाम की पुस्तक को लेकर सामने आया है, जिसे हिलाल अहमद और संतोष मीणा ने लिखा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पुस्तक में कई जगह जम्मू-कश्मीर को “India Occupied Kashmir” और “Indian Held Kashmir” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया। इतना ही नहीं, प्रतिबंधित संगठन JKLF के संस्थापक मकबूल भट को “शहीद” और “शहीद-ए-आज़म” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया।

पुस्तक के पेज 23 पर मकबूल भट का उल्लेख करते हुए लिखा गया है कि उनके “महान बलिदान” की शुरुआत छात्र जीवन से हुई थी। इसी तरह पुस्तक में भारत को कश्मीर के संदर्भ में “कब्जा करने वाला” और “दमनकारी राज्य” बताया गया है। एक स्थान पर लिखा गया है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है, लेकिन कश्मीर के मामले में उसे “कब्जा करने वाले राज्य” के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

कैसे बढ़ा विवाद?

सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में यह पुस्तक पहुँचने के बाद इसके अंश सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसके बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर तूल पकड़ गया।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए। शुरुआती जांच में स्कूल शिक्षा विभाग के 8 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया, जबकि एक संविदा कर्मचारी की सेवाएँ समाप्त कर दी गईं। साथ ही विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए।

पुलिस ने शुरू की छापेमारी

मामला यहीं नहीं रुका। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने समग्र शिक्षा कार्यालय में तलाशी ली। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित प्रकाशक के कार्यालय में भी सर्च ऑपरेशन चलाया गया।

प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि ऐसी सामग्री वाली पुस्तक सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी तक कैसे पहुँची और खरीद प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका रही।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस प्रदेश में अनुच्छेद 370 हटने के बाद नई शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों की बात की जा रही है, वहीं सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में ऐसी पुस्तक का पहुँचना प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

फिलहाल मामले की विभागीय और पुलिस जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों, लेखकों और प्रकाशकों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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