ममता राज में 100 करोड़ का महाघोटाला: अभिषेक बनर्जी के करीबी देबराज चक्रवर्ती गिरफ्तार, पूर्व MLA पत्नी अदिति मुंशी भी जांच के दायरे में

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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सिंडिकेट राज और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून का डंडा एक बार फिर पूरी ताकत से चला है। राज्य में लगातार बढ़ रहे भ्रष्टाचार के मामलों के बीच अब टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व और अभिषेक बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले नेता देबराज चक्रवर्ती को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उत्तर 24 परगना जिले के बिधाननगर नगर निगम के पूर्व पार्षद देबराज चक्रवर्ती पर आय से अधिक संपत्ति बनाने, बेनामी संपत्तियों का अंबार खड़ा करने और करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग के बेहद गंभीर आरोप हैं।

कलकत्ता हाई कोर्ट से लगा बड़ा झटका

TMC खेमे में हड़कंप मचाने वाली यह कार्रवाई कलकत्ता हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद सामने आई है। पिछले हफ्ते, कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस जय सेनगुप्ता की सिंगल-जज बेंच ने देबराज चक्रवर्ती की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था। खुद को कानून से ऊपर समझने वाले और सत्ता के संरक्षण में बेखौफ घूमने वाले चक्रवर्ती का अहंकार कोर्ट के इस फैसले के बाद पूरी तरह ढह गया, जिसके तुरंत बाद पुलिस ने उन्हें सलाखों के पीछे धकेल दिया।

‘भक्ति’ की आड़ में लूट का खेल?

देबराज चक्रवर्ती का यह बेनामी साम्राज्य केवल उन तक ही सीमित नहीं है। इस पूरे महाघोटाले में उनकी पत्नी और पूर्व टीएमसी विधायक अदिति मुंशी का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। अदिति मुंशी पश्चिम बंगाल की एक मशहूर ‘भक्ति संगीत’ गायिका हैं। पुलिस जांच में जो चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, उनके अनुसार, आरोप है कि राजarहाट-गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से तत्कालीन विधायक अदिति मुंशी और उनके पति देबराज ने विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कम से कम 100 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति को ठिकाने लगाया। इस अकूत काली कमाई को कानून की नजरों से छिपाने के लिए अपने रिश्तेदारों, करीबियों और परिचितों के नाम पर ट्रांसफर कर दिया गया था। अदिति मुंशी पर आरोप है कि उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए अपने आधिकारिक हलफनामे में अपनी वास्तविक संपत्ति को जानबूझकर बेहद कम करके दिखाया था।

विपक्ष का आरोप है कि ममता बनर्जी के शासनकाल में ‘मां, माटी, मानुष’ का नारा सिर्फ एक मुखौटा है, जिसके पीछे केवल और केवल लूट, खसोट, जबरन उगाही और मनी लॉन्ड्रिंग का धंधा फल-फूल रहा है।

जनता की अदालत में मिली शिकस्त

हालिया विधानसभा चुनावी नतीजों ने पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल टीएमसी के इन कथित भ्रष्ट नेताओं को उनकी जमीनी हकीकत दिखा दी है, जहां जनता ने इन्हें बुरी तरह हरा दिया। अब जनता की अदालत के बाद इन नेताओं को कानून की अदालत में पाई-पाई का हिसाब देना पड़ रहा है। अदालती और पुलिसिया कार्रवाई के बाद अब यह साफ संदेश गया है कि बंगाल में सिंडिकेट माफियाओं का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। देबराज चक्रवर्ती की गिरफ्तारी इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि पाप का घड़ा भरने के बाद उसका फूटना तय है।

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