‘Que Sera, Sera’ और अपनों की ‘असुरक्षा’: पंजाब चुनाव से पहले मनीष तिवारी के बागी सुर और कांग्रेस का अंदरूनी घमासान

0
image (29)

पंजाब विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज होते ही कांग्रेस के भीतर का अंदरूनी घमासान एक बार फिर खुलकर सड़कों पर आ गया है। चुनाव से ठीक पहले पार्टी संगठन में किए गए बड़े फेरबदल और नई कमेटियों के गठन ने एकजुटता दिखाने के बजाय गुटबाजी की पुरानी दरारों को और चौड़ा कर दिया है। इस पूरे फेरबदल में सबसे चौंकाने वाली बात रही कांग्रेस के बेहद वरिष्ठ नेता, राष्ट्रीय प्रवक्ता और तीन बार के लोकसभा सांसद मनीष तिवारी को पूरी तरह से नजरअंदाज कर देना।

मनीष तिवारी का ‘क्रिप्टिक’ पोस्ट और तीखा हमला

जैसे ही कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब चुनाव के लिए अपनी नई टीम और रणनीतिक कमेटियों की आधिकारिक सूची जारी की, वैसे ही मनीष तिवारी का एक सोशल मीडिया पोस्ट राजनीतिक गलियारों में भूचाल लेकर आ गया। उन्होंने अपनी इस उपेक्षा, नाराजगी और आहत स्वाभिमान को बेहद सधे हुए लेकिन तीखे शब्दों में बयां किया।

मनीष तिवारी ने लिखा कि काश उनके पास व्यक्तियों और संस्थाओं की असुरक्षाओं का कोई इलाज होता। उन्होंने एक बड़ा सवाल दागते हुए लिखा कि क्या किसी व्यक्ति में योग्यता या प्रतिभा का होना ही उसका सबसे बड़ा दोष है? इसके साथ ही उन्होंने अपनी निष्ठा का जिक्र करते हुए आगे लिखा कि कांग्रेस ने उन्हें पिछले 45 वर्षों में बहुत कुछ दिया है और उन्होंने भी अपना पूरा वयस्क जीवन इस पार्टी की सेवा में समर्पित किया है। अपने इस संदेश का अंत उन्होंने एक प्रसिद्ध गीत के रहस्यों भरे शब्दों के साथ किया—”Que Sera, Sera… Whatever will be, will be…” यानी “जो होना है, वो होकर रहेगा।”

आखिर किसकी ‘असुरक्षा’ की बात कर रहे हैं मनीष तिवारी?

राजनीतिक पंडितों के बीच अब यह सबसे बड़ा सवाल तैर रहा है कि आखिर मनीष तिवारी अपने इस पोस्ट में किस “असुरक्षा” की तरफ इशारा कर रहे हैं? क्या उनका सीधा निशाना कांग्रेस का वो केंद्रीय नेतृत्व है, जिसे उनके जैसे कद्दावर, प्रखर और स्पष्टवादी नेता की प्रतिभा से खतरा महसूस होता है? या फिर उनका यह गुस्सा पंजाब कांग्रेस के उन स्थानीय क्षत्रपों के खिलाफ है जो नहीं चाहते कि पार्टी के प्रमुख हिंदू चेहरों को राज्य की चुनावी कमान में कोई बड़ी भूमिका मिले?

हालांकि मनीष तिवारी ने अपने पूरे पोस्ट में किसी भी व्यक्ति का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनका यह दर्द ऐसे वक्त सामने आया है जब नई संगठनात्मक व्यवस्था में उन्हें एक मामूली सदस्य तक की जिम्मेदारी के लायक नहीं समझा गया।

पंजाब कांग्रेस का नया ढांचा: कौन कहां फिट हुआ और कौन छूटा बाहर?

इस नए संगठनात्मक फेरबदल में पार्टी ने पंजाब के लगभग सभी पुराने और बड़े गुटों को रेवड़ियों की तरह पद बांटकर साधने की कोशिश की है, लेकिन इस पूरे चक्रव्यूह में मनीष तिवारी को जानबूझकर बाहर छोड़ दिया गया।

पार्टी आलाकमान ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को बेहद महत्वपूर्ण चुनाव अभियान समिति (Campaign Committee) का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके साथ ही सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी की कमान सौंपी गई है और विजय इंदर सिंगला को चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। केंद्रीय नेतृत्व ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा है, जबकि प्रताप सिंह बाजवा विधानसभा में विधायक दल के नेता (CLP Leader) बने रहेंगे। इसके अतिरिक्त पार्टी ने तीन नए कार्यकारी अध्यक्षों की भी घोषणा की है, लेकिन इस भारी-भरकम सूची में वर्तमान में चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी का नाम न होना हर किसी को हैरान कर रहा है।

चुनावी बेला में क्या फिर दोहराया जाएगा पुराना इतिहास?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस का इतिहास हमेशा से सिरफुटौव्वल और अंदरूनी खींचतान का रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भी नेताओं के बीच चली वर्चस्व की लड़ाई ने कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाया था। इस बार भी चुनाव से ठीक पहले किए गए इस फेरबदल का मकसद गुटबाजी को शांत करना बताया जा रहा था, लेकिन मनीष तिवारी को किनारे किए जाने से पार्टी का एक बड़ा पारंपरिक वोट बैंक नाराज हो सकता है।

पंजाब में हिंदू आबादी करीब 38 प्रतिशत है और मनीष तिवारी को राज्य में कांग्रेस का सबसे मजबूत, पढ़ा-लिखा और प्रखर हिंदू चेहरा माना जाता है। लुधियाना, आनंदपुर साहिब और अब चंडीगढ़ से सांसद रहने वाले मनीष तिवारी जैसे जमीनी नेता की इस तरह की उपेक्षा यह साफ संकेत देती है कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।

रणनीतिक भूल या अंतहीन बगावत?

सौ बात की एक बात यह है कि कांग्रेस जब भी किसी चुनाव में उतरने की तैयारी करती है, उसकी प्राथमिकता विरोधियों से लड़ने की जगह अपने ही कद्दावर नेताओं के पर कतरने की हो जाती है। मनीष तिवारी का यह ताजा पोस्ट महज एक नाराज नेता की भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस के अंदर सुलग रहे एक नए असंतोष का ज्वालामुखी है। यह बगावत पार्टी को किस मोड़ पर लेकर जाएगी, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि ‘Que Sera, Sera’ कहकर मनीष तिवारी ने कांग्रेस आलाकमान की रातों की नींद जरूर उड़ा दी है।

Leave a Reply

What’s next

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading