‘मोहम्मद अली’ से फिर आयुष मलिक बने युवक की ‘घर वापसी’
Source: Video Screenshot
आयुष मलिक… यह एक ऐसा नाम है जो पिछले कई हफ़्तों से मुख्यधारा के मीडिया से लेकर सोशल मीडिया के गलियारों तक में खूब चर्चा का विषय बना रहा।
वजह यह थी कि इस लड़के ने एक मुस्लिम लड़की के प्रेम जाल में आकर खुद का धर्म परिवर्तन करवा लिया था। जैसे ही यह मामला नेशनल मीडिया की सुर्खियों में आया, लंबे बाल और बढ़ी हुई दाढ़ी के साथ सामने आए आयुष ने खुद को ‘मोहम्मद अली’ घोषित कर दिया था। उस वक्त इस घटना को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रूप में पेश किया गया, लेकिन अब इस पूरे मामले में एक ऐसा सनसनीखेज यू-टर्न और खुलासा सामने आया है जिसने उस समय गढ़े गए पूरे नैरेटिव को ध्वस्त करके रख दिया है।
यू-टर्न और ‘घर वापसी’: मंदिर में पूजा का वीडियो वायरल
इस्लाम स्वीकार कर खुद को मोहम्मद अली बताने वाला आयुष मलिक अब अपने घर लौट आया है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक हालिया वीडियो में वह अपने घर के मंदिर में पारंपरिक रूप से पूजा-अर्चना करता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो में वह अपने किए पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए अपने परिवार और समाज से हाथ जोड़कर माफी मांगता नजर आ रहा है। यानी सीधे शब्दों में कहें तो आयुष मलिक की ‘घर वापसी’ हो चुकी है। लेकिन यहाँ सबसे बड़ा सवाल सिर्फ उसकी वापसी का नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि महज़ कुछ सालों के भीतर ऐसा क्या हुआ कि जिसने कभी कैमरे के सामने स्वेच्छा से धर्म बदलने का दावा किया था, आज वही रोते हुए अपने मूल धर्म में लौटने को मजबूर हो गया?
प्रेम का मुखौटा और करोड़ों की संपत्ति पर डाका
इस पूरे चक्रव्यूह का सच तब सामने आना शुरू हुआ जब आयुष के पिता देवराज मलिक ने हिम्मत जुटाकर पुलिस में एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई। पिता का आरोप है कि उनके बेटे को एक महिला जिम ट्रेनर चांदनी कुरैशी ने सुनियोजित तरीके से अपने प्रेम जाल में फंसाया और उस पर अपना प्रभाव कायम किया। इसके बाद एक गहरी साजिश के तहत उसका धर्म परिवर्तन कराकर निकाह पढ़ा दिया गया। परिवार का सीधा आरोप है कि यह कोई सामान्य विवाह नहीं था, बल्कि परिवार की करोड़ों रुपये की कीमती संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा करने का एक बड़ा और संगठित षड्यंत्र था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने चांदनी कुरैशी, उसके पिता इस्लाम कुरैशी और कुछ स्थानीय मौलानाओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चांदनी और उसके पिता को हिरासत में ले लिया है, जबकि अन्य सह-आरोपियों की तलाश जारी है। जांच एजेंसियां अब बैंक खातों के लेन-देन, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स, सीसीटीवी फुटेज और पिछले चार सालों की संदिग्ध गतिविधियों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं ताकि यह साफ हो सके कि इस खेल के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट तो काम नहीं कर रहा था।
प्रोपेगैंडा ब्रिगेड का ‘आइकन’ और नैरेटिव की करारी हार
जब आयुष ने शुरुआत में दबाव और ब्रेनवॉश के प्रभाव में आकर इस्लाम कबूलने की बात कही थी, तब देश के एक खास वामपंथी और तुष्टिकरण वाले इकोसिस्टम ने इसे अपनी बड़ी वैचारिक जीत मान लिया था। ‘द वायर’ (The Wire) की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने तो बकायदा आयुष मलिक की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उसे “The new Indian icon. A fearless hero” (भारत का नया प्रतीक, एक निडर नायक) तक घोषित कर दिया था।
प्रोपेगैंडा की आड़ में इन बुद्धिजीवियों ने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की कि उस धर्मांतरण के पीछे का असली सच क्या था। आज जब आयुष ने खुद सामने आकर यह कबूल कर लिया है कि चांदनी ने उसका पूरी तरह ब्रेनवॉश किया था और धोखे से निकाह सिर्फ इसलिए रचाया गया ताकि उसकी करोड़ों की पारिवारिक संपत्ति हड़पी जा सके, तब इस प्रोपेगैंडा ब्रिगेड के मुंह पर ताला लग गया है।
निष्कर्ष: ‘लव जिहाद’ के नेक्सस का नया पैटर्न
आयुष मलिक के इस पूरे मामले ने देश में चल रहे ‘लव जिहाद’ के विमर्श को एक नया मोड़ दे दिया है। अब तक यह माना जाता था कि इस तरह के संगठित नेक्सस में केवल मुस्लिम युवक ही शामिल होते हैं, लेकिन इस घटना ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि इस जिहादी और विस्तारवादी विचारधारा को फैलाने में अब लड़कियां भी एक सक्रिय टूल के रूप में इस्तेमाल की जा रही हैं। यह मामला समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि कैसे प्रेम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के छद्म मुखौटे का इस्तेमाल करके युवाओं का ब्रेनवॉश किया जा रहा है और उनकी पैतृक संपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है।
