BSP में टिकटों की सरेआम ‘बोली’? स्टिंग ऑपरेशन में दावा: मायावती से मिलने के 5 लाख, टिकट के 3.5 करोड़!
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सियासी पारा एक बार फिर चरम पर है। खुद को गरीबों, शोषितों और दलितों की आवाज बताने वाली बहुजन समाज पार्टी (BSP) एक बड़े विवाद में घिर गई है। एक हिंदी समाचार पत्र (दैनिक भास्कर) के स्टिंग ऑपरेशन ने बंद कमरों के भीतर चल रहे कथित ‘टिकट खेल’ का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। इस खुलासे के बाद सूबे के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और सीधे पार्टी सुप्रीमो मायावती पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बंद कमरों में ‘रेट कार्ड’, मिलने के भी पैसे!
दावा किया जा रहा है कि आगामी चुनाव से ठीक पहले बीएसपी के भीतर उम्मीदवारों से टिकट के बदले 3 करोड़ से लेकर 3.5 करोड़ रुपये तक की मांग की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह रकम सिर्फ चुनाव लड़ने का ‘रेट कार्ड’ है। अगर कोई नेता या दावेदार पार्टी चीफ मायावती से सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात करना चाहता है, तो उसे भी कथित तौर पर 5 लाख रुपये एडवांस देने होंगे।
स्टिंग में BSP के बड़े चेहरों पर आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, इस स्टिंग ऑपरेशन में बीएसपी के दो बड़े नेताओं के चेहरे कैमरे पर आए हैं:
- शैलेंद्र गौतम (जिलाध्यक्ष, लखनऊ): स्टिंग में लखनऊ के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र गौतम बंद कमरे में मायावती से मिलने की पूरी प्रक्रिया समझाते नजर आए। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि अगर कोई दावेदार के रूप में ‘बहनजी’ से मिलना चाहता है, तो उसे ₹5 लाख साथ रखने होंगे। इस मुलाकात का कोई कागजी हिसाब-किताब नहीं होगा।
- विश्वनाथ पाल (प्रदेश अध्यक्ष, BSP): रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने सीधे तौर पर चुनावी टिकट की कीमत बताई। उन्होंने दावा किया कि बीएसपी के सिंबल पर चुनाव लड़ने के लिए पार्टी को 3 करोड़ 35 लाख रुपये देने होंगे, जिसके ढाई महीने बाद प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दी जाएगी। इसके अलावा, मुख्य व्यक्ति के साथ किसी अन्य शख्स को भी मिलना है, तो ₹2 लाख का अतिरिक्त चार्ज बताया गया।
क्या बाबा साहब के आदर्शों से भटकी पार्टी?
कभी बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों और मान्यवर कांशीराम के संघर्षों की बदौलत देश की राजनीति में मजबूत पहचान बनाने वाली बीएसपी आज गंभीर आरोपों के घेरे में है। सरेआम लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने वाले इस कथित खुलासे ने पार्टी की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
मायावती की सफाई: ‘विरोधियों का घिनौना षड्यंत्र’
इस स्टिंग ऑपरेशन के सामने आते ही बहुजन समाज पार्टी के भीतर खलबली मच गई है। हालांकि, इन आरोपों पर पलटवार करते हुए पार्टी सुप्रीमो मायावती ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। मायावती का कहना है कि:
“यह सब विरोधियों का एक घिनौना षड्यंत्र है। चुनावों से ठीक पहले जनता को गुमराह करने के लिए इस तरह की झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं।”
इस बड़े खुलासे के बाद अब गेंद उत्तर प्रदेश के मतदाताओं के पाले में है। आने वाले चुनावों में जनता इस ‘स्टिंग’ को देखकर क्या फैसला लेती है और क्या मायावती पर उनका भरोसा कायम रहता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
