अमित शाह मानहानि केस में फिर टली सुनवाई, 2018 का मामला अब भी राहुल गांधी का पीछा नहीं छोड़ रहा
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर अपने एक पुराने मानहानि मामले को लेकर चर्चा में हैं। यह मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़ी कथित टिप्पणी से संबंधित है, जिसकी सुनवाई पिछले कई वर्षों से अदालत में चल रही है।
ताजा घटनाक्रम में मामले की सुनवाई एक बार फिर टल गई है। राहुल गांधी की ओर से दाखिल एक याचिका के बाद अदालत ने संबंधित रिकॉर्ड दूसरी अदालत में भेजे जाने की प्रक्रिया पूरी होने तक सुनवाई आगे बढ़ा दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2018 का है। आरोप है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने उस समय भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अमित शाह को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।
इसके बाद बीजेपी नेता विजय मिश्रा ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी की टिप्पणी से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
राहुल गांधी को करना पड़ा था अदालत का सामना
मामले की सुनवाई के दौरान राहुल गांधी को कई बार अदालत में पेश होना पड़ा। उन्हें जमानत भी लेनी पड़ी और अदालत के समक्ष अपना पक्ष भी रखना पड़ा।
जुलाई 2024 में राहुल गांधी ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया था। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है।
इसके बाद मामले की सुनवाई विभिन्न चरणों से गुजरती रही।
क्यों टली सुनवाई?
ताजा सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से एक याचिका दाखिल की गई। इस याचिका में कथित रूप से साक्ष्य के तौर पर पेश की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग की फोरेंसिक जांच और आवाज के मिलान की मांग की गई है।
इसी प्रक्रिया के तहत मामले से जुड़े रिकॉर्ड दूसरी अदालत में भेजे गए हैं। रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण सुनवाई को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
अब अदालत अगली तारीख पर इस मामले की सुनवाई करेगी।
कांग्रेस और शिकायतकर्ता पक्ष के अलग-अलग तर्क
कांग्रेस लगातार इस मामले को राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताती रही है। पार्टी का कहना है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए इस प्रकार के मुकदमों का इस्तेमाल किया जाता है।
वहीं शिकायतकर्ता पक्ष का तर्क है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय नेताओं को अपने बयानों और शब्दों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बयान दिया गया है, तो उसके लिए कानूनी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
आठ साल बाद भी जारी है कानूनी लड़ाई
2018 में दर्ज हुआ यह मामला अब 2026 में भी जारी है। इस दौरान देश की राजनीति में कई बदलाव आए, लेकिन यह कानूनी विवाद अभी तक समाप्त नहीं हो सका है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी की भूमिका बढ़ने के बावजूद यह मामला समय-समय पर चर्चा में आता रहा है और उनके राजनीतिक विरोधी इसे लगातार मुद्दा बनाते रहे हैं।
अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
अब सभी की नजरें अदालत की अगली सुनवाई पर हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फोरेंसिक जांच और ऑडियो रिकॉर्डिंग से जुड़ी मांग पर अदालत क्या फैसला सुनाती है।
फिलहाल इतना तय है कि अमित शाह से जुड़ी कथित टिप्पणी को लेकर शुरू हुई यह कानूनी लड़ाई आठ साल बाद भी समाप्त नहीं हुई है और आने वाले समय में भी यह मामला राजनीतिक तथा कानूनी बहस का विषय बना रह सकता है।
