तीसरे विश्व युद्ध का खतरा टला: अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक पीस डील, जानें समझौते की 5 बड़ी बातें
दुनिया जिस तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) के मुहाने पर खड़ी थी, वहां से एक बेहद राहत भरी खबर आई है। मिडिल ईस्ट में दशकों पुरानी दुश्मनी को पीछे छोड़ते हुए अमेरिका और ईरान के बीच महायुद्ध का खतरा फिलहाल टल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने एक ऐतिहासिक पीस डील (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस अप्रत्याशित समझौते ने न सिर्फ वैश्विक सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी एक बड़ी तबाही से बचा लिया है।
आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक समझौते की बड़ी बातें और दुनिया पर इसके होने वाले दूरगामी असर।
1. सभी मोर्चों पर तुरंत सीजफायर
इस समझौते के तहत सबसे पहला और बड़ा कदम मिलिट्री ऑपरेशन्स को रोकना है। अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर अपनी सैन्य गतिविधियों को तुरंत प्रभाव से रोकने का फैसला किया है। इससे मिडिल ईस्ट में महीनों से जारी हिंसा और बमबारी पर लगाम लगेगी।
2. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का रास्ता साफ
वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई के लिहाज से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को लेकर भी बड़ा फैसला हुआ है। ईरान अगले 60 दिनों के लिए इस रूट को सभी कमर्शियल (व्यापारिक) जहाजों के लिए पूरी तरह से मुफ्त और सुरक्षित खोलने पर सहमत हो गया है। इस फैसले से दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई सुगम होगी और तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी।
3. परमाणु कार्यक्रम पर लगाम और प्रतिबंधों से राहत
इस डील के बदले दोनों देशों ने ‘गिव एंड टेक’ की नीति अपनाई है:
- ईरान का कदम: ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम (Enriched Uranium) के स्टॉक को डाइल्यूट यानी कम करने के लिए तैयार हो गया है। साथ ही, वह संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु संस्था IAEA की सख्त निगरानी में परमाणु हथियार न बनाने की कसम खाएगा।
- अमेरिका की राहत: इसके बदले में अमेरिका ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को हटाएगा। ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में खुलकर तेल बेचने की छूट मिलेगी और विदेशी बैंकों में फ्रीज (जब्त) किए गए उसके अरबों डॉलर भी वापस मिल सकेंगे।
4. ईरान के पुनर्निर्माण के लिए $300 बिलियन का फंड
युद्ध की विभीषिका से तबाह हो चुके ईरान को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए एक बड़ा आर्थिक पैकेज तैयार किया गया है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश मिलकर ईरान के बुनियादी ढांचे को सुधारने और पुनर्निर्माण के लिए 300 बिलियन डॉलर (लगभग 25 लाख करोड़ रुपये) का एक भारी-भरकम फंड देंगे।
5. डोनाल्ड ट्रंप का यू-टर्न और मंदी का खतरा
जो डोनाल्ड ट्रंप कभी ईरान को पूरी तरह बर्बाद करने की धमकियां दे रहे थे, आज वे खुद इस डील का बचाव कर रहे हैं। ट्रंप ने समझौते को सही ठहराते हुए कहा कि अगर यह डील नहीं होती, तो पूरी दुनिया एक भयंकर और लाइलाज आर्थिक मंदी (Economic Recession) की चपेट में आ जाती।
60 दिनों का ‘अल्टीमेटम’
यह ऐतिहासिक समझौता अभी सिर्फ एक शुरुआत है। यह एक शुरुआती एमओयू (MoU) है, जिसे पूरी तरह अमल में लाने के लिए दोनों देशों के पास फाइनल एग्रीमेंट पर मुहर लगाने के लिए केवल 60 दिनों का वक्त है। अगर अगले दो महीनों में दोनों देश शर्तों पर टिके रहते हैं, तो मिडिल ईस्ट में दशकों पुरानी इस दुश्मनी का हमेशा के लिए अंत हो सकता है। दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह शांति समझौता स्थायी रूप ले पाता है या नहीं।
