झारखंड राज्यसभा चुनाव: क्या तेजस्वी यादव ने राहुल गांधी को दिया बड़ा झटका? महागठबंधन में आर-पार!

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झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस और आरजेडी में भारी घमासान। कांग्रेस ने लगाया ‘पीठ में छुरा घोंपने’ का आरोप, तो आरजेडी ने दी ‘आत्ममंथन’ करने की सलाह।

भारतीय राजनीति में कांग्रेस और राहुल गांधी की मौजूदा स्थिति पर यह शेर सटीक बैठता नजर आ रहा है। विपक्षी एकजुटता का दम भरने वाले ‘इंडी गठबंधन’ (INDIA Alliance) की कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। बीजेपी से मुकाबला करने से पहले राहुल गांधी को अपने ही सहयोगियों से कड़ी चुनौती मिल रही है। ताजा मामला झारखंड राज्यसभा चुनाव का है, जहां कांग्रेस को किसी विरोधी ने नहीं, बल्कि उसकी अपनी ही सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने बड़ा झटका दिया है। चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस नेताओं ने तेजस्वी यादव की पार्टी पर पीठ में खंजर भोंकने का सीधा आरोप लगाया है।

क्रॉस वोटिंग से हारी कांग्रेस

झारखंड में राज्यसभा चुनाव के नतीजे सामने आते ही महागठबंधन की एकजुटता ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। कांग्रेस ने इस चुनाव में अपने कद्दावर नेता प्रणव झा को मैदान में उतारा था। उम्मीद थी कि गठबंधन के सभी दल एकजुट होकर कांग्रेस उम्मीदवार को जिताएंगे, लेकिन चुनाव के दिन हुई ‘क्रॉस वोटिंग’ ने पासा पलट दिया। नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा।

इस हार के बाद दिल्ली से लेकर पटना और रांची तक सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है। कांग्रेस का खुला आरोप है कि आरजेडी (RJD) के विधायकों ने ऐन वक्त पर गद्दारी की और जानबूझकर कांग्रेस प्रत्याशी को हरवाया।

RJD का पलटवार: कांग्रेस को याद दिलाई ‘औकात’

कांग्रेस के इन गंभीर आरोपों पर राष्ट्रीय जनता दल ने भी बेहद कड़ा रुख अपनाया है। आरजेडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया। आरजेडी की ओर से साफ कहा गया कि:

“झारखंड के नतीजों से यह स्पष्ट है कि कांग्रेस अपने खुद के विधायकों को संभाल पाने में नाकाम साबित हो रही है। दूसरों पर बिना सोचे-समझे कीचड़ उछालने से बेहतर होगा कि कांग्रेस अपने अंदर झांके और आत्ममंथन करे।”

आरजेडी के इस बयान ने जलती आग में घी का काम किया है और दोनों पार्टियों के बीच की कड़वाहट को जगजाहिर कर दिया है।

गठबंधन में क्यों फेल हो रहे हैं राहुल गांधी?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर राहुल गांधी की लीडरशिप और ‘पॉलिटिकल मैनेजमेंट’ पर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी गठबंधन तो बना लेते हैं, साझा रैलियां भी कर लेते हैं और तस्वीरें भी खिंचवा लेते हैं, लेकिन जब बात फ्लोर मैनेजमेंट और आपसी भरोसे की आती है, तो वह कमजोर साबित होते हैं। यही वजह है कि एक-एक कर उनके सहयोगी दल ही उन्हें चुनावी मैदान में गच्चा दे रहे हैं।

क्या टूटने की कगार पर है कांग्रेस-आरजेडी का रिश्ता?

झारखंड के इस सियासी ड्रामे ने बिहार की राजनीति पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस चुनाव ने कांग्रेस और आरजेडी के रिश्तों में ऐसी दरार डाल दी है, जिसे भरना अब नामुमकिन सा लग रहा है। आरजेडी अब कांग्रेस को एक कमजोर और लाचार सहयोगी के रूप में देख रही है और आगामी बिहार विधानसभा चुनावों में वह कांग्रेस के सामने झुकने के मूड में बिल्कुल नहीं है।

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