क्या आधार कार्ड नागरिकता का पक्का सबूत है? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम मामले में केंद्र सरकार, सभी राज्यों और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। यह मामला सीधे तौर पर ‘आधार कार्ड’ और ‘नागरिकता’ के बीच के संबंध से जुड़ा है। कोर्ट ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या आधार कार्ड का इस्तेमाल नागरिकता, निवास या जन्मतिथि के कानूनी प्रमाण के रूप में किया जाना चाहिए या नहीं।
याचिका का आधार क्या है?
यह जनहित याचिका (PIL) भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि आधार अधिनियम, 2016 की धारा-9 के तहत, आधार कार्ड को केवल एक ‘पहचान का प्रमाण’ माना गया है, न कि ‘नागरिकता का प्रमाण’। याचिकाकर्ता का कहना है कि इसके बावजूद, देश में आधार कार्ड का उपयोग हर जगह अनिवार्य कर दिया गया है।
कानूनी पेच और खतरे
याचिका में इस बात पर चिंता जताई गई है कि आधार का उपयोग सरकारी सब्सिडी, स्कूल एडमिशन, ड्राइविंग लाइसेंस और यहाँ तक कि वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए भी किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि आधार कार्ड को नागरिकता के सबूत के रूप में पेश करने से उन विदेशी नागरिकों को भी भारतीय दस्तावेजों का लाभ उठाने का मौका मिल जाता है, जो अवैध रूप से आधार बनवा लेते हैं। इसके परिणामस्वरूप राशन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी पहचान पत्र भी फर्जी तरीके से बनवाए जा रहे हैं।
यूआईडीएआई (UIDAI) का रुख
लंबे समय से UIDAI भी यह स्पष्ट करता आया है कि आधार कार्ड का उद्देश्य केवल पहचान स्थापित करना है। इसका किसी व्यक्ति की नागरिकता से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर आधार को नागरिकता के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की खबरें लगातार आती रही हैं।
अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अब सभी की निगाहें 7 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय हो सकता है कि क्या भविष्य में आधार के इस्तेमाल को सिर्फ ‘पहचान’ तक ही सीमित रखा जाएगा या इसके कानूनी दायरे में कोई बड़ा बदलाव होगा।
