TMC में बड़ी बगावत: ‘विदेश में बैठकर ट्वीट करने वाली…’, महुआ मोइत्रा पर भड़कीं बागी सांसद काकोली घोष, 20 सांसदों के साथ का दावा

0
5f0b77e6-bc4f-4deb-b3ca-cd77dc679804

नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर की कलह अब पूरी तरह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वाली महुआ मोइत्रा पर तीखा हमला बोला है। एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में काकोली घोष ने महुआ मोइत्रा की राजनीतिक साख पर सवाल उठाते हुए उन्हें केवल ‘पब्लिसिटी का भूखा’ करार दिया।

महुआ मोइत्रा पर बरसीं काकोली घोष काकोली घोष ने महुआ मोइत्रा को निशाना बनाते हुए कहा, “वह (महुआ) तो कोई राजनेता ही नहीं हैं। जब 1976 में ममता बनर्जी राजनीति में उतरी थीं, तो इन लोगों का कहीं अता-पता भी नहीं था। मुझे लगता है कि विदेश में बैठकर ट्वीट करने वाली इस महिला का तब जन्म भी नहीं हुआ होगा। वह न तो कल राजनेता थीं और न ही आज हैं। जो लोग आज खुद को ममता बनर्जी का पुराना साथी बताते हैं, वे केवल मीडिया कवरेज और अपनी पब्लिसिटी के लिए बयानबाजी करते हैं।”

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें ‘गद्दार, मतलबी और लालची’ कहा था, जिसके बाद काकोली घोष का यह पलटवार आया है।

20 सांसदों के समर्थन का दावा, बीजेपी नेता से मुलाकात काकोली घोष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को सांसदों के मतभेद को लेकर सौंपे गए पत्र पर भी हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के बागी गुट के पास करीब 20 सांसदों का समर्थन हासिल है और वह खुद भी इसी गुट का हिस्सा हैं।

इस बीच, दिल्ली में सियासी हलचल उस वक्त और तेज हो गई जब टीएमसी के बागी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर एक बंद कमरे में बैठक की। इस बैठक में प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, अरूप चक्रवर्ती, कालिपद सोरेन और असित कुमार माल जैसे कई लोकसभा सांसदों की मौजूदगी की बात सामने आई है।

ममता बनर्जी के नेतृत्व को बड़ी चुनौती? यह संकट ऐसे समय में आया है जब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विपक्षी एकता (INDIA गठबंधन) की बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंची हुई हैं। पार्टी के भीतर असंतोष का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने पार्टी और अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा बागी खेमे का दावा है कि बंगाल में भी पार्टी के 80 में से 60 विधायक उनके साथ हैं, जिन्होंने निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में समर्थन दिया है और खुद को “वास्तविक तृणमूल” बताया है। इसे ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर की अब तक की सबसे बड़ी संगठनात्मक चुनौती माना जा रहा है।

Leave a Reply

What’s next

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading