अशोक गहलोत के बयान से कांग्रेस में मचा सियासी घमासान, नेतृत्व को लेकर फिर उठे सवाल

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कांग्रेस की आंतरिक राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत के हालिया बयान ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक खींचतान को लेकर नई बहस छेड़ दी है। गहलोत ने दावा किया है कि वह कांग्रेस अध्यक्ष बनना चाहते थे, लेकिन उनके साथ “साजिश” हुई, जिसके कारण ऐसा नहीं हो सका।

राजनीतिक गलियारों में उनके इस बयान को पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही गुटबाजी और असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, भाजपा भी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर क्या बोले गहलोत?

रविवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान अशोक गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा “कौन कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना चाहेगा? जब सोनिया गांधी ने मुझसे कहा तो क्या मैं मना करूंगा? मुझे लगता है कि मेरे साथ साजिश की गई। मैं तो खुद कांग्रेस अध्यक्ष बनना चाहता था।”

गहलोत के इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर पुराने घटनाक्रमों और नेतृत्व को लेकर हुए विवादों की चर्चा फिर से तेज हो गई है।

सचिन पायलट को लेकर भी कही बड़ी बात

अशोक गहलोत ने कांग्रेस नेता सचिन पायलट के साथ अपने पुराने राजनीतिक संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय राजनीति में सचिन पायलट को आगे बढ़ाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। गहलोत ने कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि सचिन पायलट ने कभी सार्वजनिक रूप से इस सहयोग का उल्लेख नहीं किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान राजस्थान कांग्रेस में वर्षों से चली आ रही खींचतान की याद दिलाता है।

क्या पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश?

गहलोत के बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि वरिष्ठ नेता द्वारा पुराने मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाना पार्टी नेतृत्व को एक संदेश देने की कोशिश हो सकती है।

हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

भाजपा ने साधा निशाना

अशोक गहलोत के बयान को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, “गहलोत बंगाल का बहाना बनाकर राजस्थान के एक पुराने जिन्न को बोतल से बाहर निकाल रहे हैं। पिछले 10 वर्षों का इतिहास गवाह है कि जब-जब कांग्रेस आलाकमान सचिन पायलट को कोई नई जिम्मेदारी देने का विचार करता है, तब-तब गहलोत हॉर्स ट्रेडिंग का मुद्दा उछाल देते हैं।”

भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस आज भी आंतरिक गुटबाजी और नेतृत्व संघर्ष से पूरी तरह उबर नहीं पाई है, जिसका असर उसके राजनीतिक प्रदर्शन पर दिखाई देता है।

कांग्रेस के सामने चुनौती

कांग्रेस लंबे समय से संगठन को मजबूत करने और नए नेतृत्व को आगे लाने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं के बयान पार्टी के भीतर मौजूद मतभेदों को फिर सुर्खियों में ला रहे हैं। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि गहलोत के बयान को कांग्रेस नेतृत्व किस तरह से लेता है और क्या इससे पार्टी के भीतर किसी नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत होती है।

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