परमिशन मिला स्कूल का और बना दिया मदरसा, अवैध मदरसे के रजिस्टर में छिपे कई राज

0
मध्य प्रदेश अवैध मदरसा

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के बादाखेड़ी गांव में संचालित एक शैक्षणिक संस्थान के निरीक्षण के दौरान ऐसी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिन्होंने बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और संरक्षण को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच टीम के अनुसार रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर पाया गया, जिसके बाद पूरे मामले की गंभीरता बढ़ गई है।

रिकॉर्ड कुछ और, हकीकत कुछ और

निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि सरकारी ऑनलाइन पोर्टल पर जहां केवल 37 छात्राओं का पंजीयन दर्ज था, वहीं स्कूल के रजिस्टर में 71 छात्राओं के नाम दर्ज पाए गए। लेकिन जब जांच टीम मौके पर पहुंची, तो परिसर में एक भी छात्रा मौजूद नहीं मिली।

यही नहीं, परिसर में बड़ी संख्या में स्कूल बैग, लगेज, बक्से और अन्य निजी सामान भी मिला। उपलब्ध सामग्री को देखकर यह आशंका जताई गई कि परिसर में बड़ी संख्या में छात्राएं रहती रही होंगी। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि छात्राओं का सामान मौजूद था, तो छात्राएं कहां थीं?

स्कूल या मदरसा?

जांच के दौरान यह भी पाया गया कि स्कूल के नाम पर कथित रूप से मदरसे का संचालन किया जा रहा था। यह संस्थान दारुल उलूम अहले सुन्नत वल जमात मोइनिया फैजान-ए-गरीब नवाज द्वारा संचालित बताया गया है। इसी परिसर में मोइनिया गर्ल्स स्कूल भी संचालित किया जा रहा था।

मध्य प्रदेश बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा और उनकी टीम जब निरीक्षण के लिए पहुंची, तो उन्हें कई ऐसी बातें मिलीं, जिन्होंने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया।

मान्यता 6वीं से 8वीं तक, लेकिन मिलीं 12वीं तक की किताबें

शुरुआती जांच में सामने आया कि संस्थान को मध्य प्रदेश बोर्ड से केवल कक्षा 6 से 8 तक संचालन की मान्यता प्राप्त है। लेकिन निरीक्षण के दौरान परिसर से कक्षा 3 से लेकर 12वीं तक की किताबें और अध्ययन सामग्री बरामद हुई।

इससे यह आशंका मजबूत हुई कि संस्थान में स्वीकृत सीमा से बाहर की कक्षाएं भी संचालित की जा रही थीं। यदि ऐसा है, तो यह सीधे तौर पर नियमों के उल्लंघन का मामला बनता है।

बंद कमरों ने बढ़ाए सवाल

निरीक्षण के दौरान टीम ने स्कूल कार्यालय और भवन की ऊपरी मंजिल पर स्थित लगभग 10 कमरों को खोलने के लिए कहा। आरोप है कि संस्थान प्रबंधन ने बार-बार कहने के बावजूद उन कमरों को नहीं खोला।

बाल आयोग का कहना है कि यदि संस्थान की सभी गतिविधियां नियमों के अनुरूप थीं, तो कमरों को खोलने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी। बंद कमरों को लेकर अब कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।

हॉस्टल की अनुमति नहीं, फिर सामान किसका?

जांच में यह भी सामने आया कि परिसर में बड़ी मात्रा में छात्राओं का सामान मौजूद था, जबकि हॉस्टल संचालन की अनुमति को लेकर भी सवाल उठे हैं। यदि परिसर में छात्राएं रह रही थीं, तो क्या इसके लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी? और यदि नहीं, तो यह एक गंभीर प्रशासनिक मुद्दा बन सकता है।

जांच के बाद उठे कई बड़े सवाल

पूरा मामला अब कई महत्वपूर्ण प्रश्नों को जन्म दे रहा है:

  • ऑनलाइन पोर्टल और स्कूल रजिस्टर के आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर क्यों था?
  • परिसर में छात्राओं का सामान मौजूद होने के बावजूद छात्राएं कहां थीं?
  • मान्यता से बाहर की कक्षाओं का संचालन किया जा रहा था या नहीं?
  • बंद कमरों में क्या था, जिन्हें जांच टीम को नहीं दिखाया गया?
  • हॉस्टल संचालन की अनुमति थी या नहीं?

इन सवालों के जवाब अब प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही सामने आ पाएंगे। फिलहाल, निरीक्षण में सामने आई अनियमितताओं ने स्थानीय प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़ी एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

Leave a Reply

What’s next

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading