झारखंड में INDIA गठबंधन में दरार? राज्यसभा सीट को लेकर JMM और कांग्रेस के बीच तकरार बढ़ी, संकट में आ सकता है अलायंस

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रांची:झारखंड के राजनीतिक गलियारों में इस समय हलचल काफी तेज है। राज्य में सत्तारूढ़ महागठबंधन यानी INDIA अलायंस के दो सबसे बड़े सहयोगियों— झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)— के बीच राज्यसभा चुनाव की एक सीट को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस गतिरोध को समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो राज्य में गठबंधन के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

राज्यसभा सीट बनी विवाद की मुख्य वजह

झारखंड में खाली हो रही राज्यसभा सीट पर दोनों ही दल अपना-अपना दावा मजबूत मान रहे हैं। कांग्रेस का तर्क है कि राज्य सरकार और लोकसभा के पिछले घटनाक्रमों में उसने JMM का बढ़-चढ़कर साथ दिया है, इसलिए इस बार उच्च सदन (राज्यसभा) की यह सीट कांग्रेस के खाते में जानी चाहिए। कांग्रेस के प्रदेश स्तर के नेताओं ने आलाकमान को अपनी इस इच्छा से अवगत करा दिया है और दिल्ली में भी इस पर मंथन चल रहा है।

वहीं दूसरी ओर, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) इस सीट को किसी भी कीमत पर अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता। JMM नेताओं का मानना है कि राज्य के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों और संख्या बल के लिहाज से उनका दावा अधिक स्वाभाविक है। JMM के रणनीतिकार अपनी जमीन मजबूत रखने के लिए इस सीट पर अपनी पार्टी का ही उम्मीदवार उतारने के पक्ष में हैं।

क्या टूट जाएगा सूबे में INDIA गठबंधन?

दोनों दलों के बीच बढ़ती इस वैचारिक दूरी और तकरार ने गठबंधन के भविष्य पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि यदि राज्यसभा सीट के आवंटन पर दोनों पार्टियां किसी एक नाम पर सहमत नहीं हुईं, तो यह तल्खी आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है। हालांकि, दोनों ही दलों के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि वे गठबंधन धर्म का सम्मान करते हैं, लेकिन अपने राजनीतिक हितों और कार्यकर्ताओं की भावनाओं की अनदेखी भी नहीं कर सकते।

शीर्ष नेतृत्व के फैसले पर टिकी निगाहें

वर्तमान स्थिति को देखते हुए गेंद अब दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के पाले में चली गई है। रांची से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर जारी है। कांग्रेस के केंद्रीय नेता JMM के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिशों में जुटे हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि दोनों दलों के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है। समन्वय समिति और बड़े नेताओं के हस्तक्षेप के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि INDIA गठबंधन इस अंदरूनी कलह से पार पा पाता है या फिर राज्य में कोई नया सियासी समीकरण जन्म लेगा।

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