Bengal Politics: अभिषेक और कल्याण बनर्जी पर हमले के बाद सवालों के घेरे में महुआ मोइत्रा, आलोचकों ने पूछा- ‘जब बंगाल सुलगता है, तब कहां रहती हैं फायरब्रांड नेता?’
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दिग्गज नेताओं—अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी—पर हुए कथित हमलों के बाद राज्य की सियासत में भूचाल आया हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच टीएमसी की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा भी अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई हैं, लेकिन इस बार वह अपनी ही प्रतिक्रिया और पुराने रुख को लेकर विरोधियों के निशाने पर हैं। आलोचकों और विपक्षी नेताओं ने महुआ मोइत्रा की चुनिंदा सक्रियता (Selective Activism) पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा किया है।
महुआ मोइत्रा के बयान पर क्यों मचा बवाल? अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें साझा कर हमलावरों का संबंध भाजपा से होने का दावा किया था। मोइत्रा के इसी आक्रामक रुख पर अब पलटवार शुरू हो गया है। आलोचकों का कहना है कि महुआ मोइत्रा केवल अपनी पार्टी के शीर्ष नेताओं या खुद से जुड़े मुद्दों पर ही इतनी तत्परता दिखाती हैं। जब पश्चिम बंगाल के आम नागरिक या विपक्षी कार्यकर्ता राजनीतिक हिंसा का शिकार होते हैं, तब टीएमसी की इस फायरब्रांड नेता की ‘फायर’ और संवेदनशीलता पूरी तरह गायब हो जाती है।
‘चुनिंदा राजनीति’ करने का लगा आरोप विपक्ष का आरोप है कि महुआ मोइत्रा अक्सर राष्ट्रीय मंचों पर लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी का भाषण देती हैं, लेकिन खुद उनके गृह राज्य बंगाल में जब कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ती हैं, तो वह चुप्पी साध लेती हैं। आलोचकों ने सवाल उठाया कि संदेशखाली से लेकर आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना और बंगाल में आए दिन होने वाली चुनावी हिंसा के वक्त महुआ मोइत्रा का यह आक्रामक रूप क्यों नहीं दिखाई दिया? पार्टी के बड़े नेताओं (अभिषेक और कल्याण बनर्जी) पर आंच आते ही तुरंत एक्टिव होने वाली महुआ मोइत्रा पर अब ‘सिलेक्टिव आउटरेज’ (चुनिंदा आक्रोश) का ठप्पा लगाया जा रहा है।
कल्याण बनर्जी के दावों के बीच महुआ की भूमिका पर सवाल एक तरफ जहां सांसद कल्याण बनर्जी ने इस हमले को अपनी जान लेने की साजिश बताते हुए भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया, वहीं आलोचक इसे टीएमसी का अंदरूनी ड्रामा करार दे रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महुआ मोइत्रा द्वारा इस मामले में कूदना और तस्वीरों के जरिए भाजपा को घेरना, असल में पार्टी के भीतर अपनी वफादारी साबित करने और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की एक कोशिश है। आलोचकों के अनुसार, महुआ मोइत्रा तथ्यों की जांच किए बिना केवल राजनीतिक लाभ के लिए तस्वीरें शेयर कर मनगढ़ंत कहानियां गढ़ रही हैं।
दबाव में टीएमसी की फायरब्रांड नेता भ्रष्टाचार के आरोपों और संसद से निष्कासन (जिसके बाद वह दोबारा चुनकर आईं) के दौर से ही महुआ मोइत्रा लगातार विवादों में रही हैं। अब बंगाल की इस हालिया घटना ने उन्हें एक बार फिर विवादों के केंद्र में ला दिया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक लोग पूछ रहे हैं कि क्या महुआ मोइत्रा की राजनीति सिर्फ ट्विटर (X) और अपनी पार्टी के आकाओं को खुश करने तक ही सीमित है? इस चौतरफा हमले ने निश्चित रूप से टीएमसी की इस तेजतर्रार नेता को बैकफुट पर ला दिया है।
