जज ने विजय की पार्टी को दिया ‘440 वोल्ट’ का झटका, TVK को लगाई गई फटकार!

0
ChatGPT Image May 30, 2026, 04_53_21 PM

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पीएम मोदी से मुलाकात और अपनी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहने वाले विजय इस बार कानूनी विवाद में घिर गए हैं। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) पर चुनाव प्रचार के दौरान बच्चों का इस्तेमाल कर मतदाताओं को प्रभावित करने का आरोप लगा है, जिस पर मद्रास हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला विधानसभा चुनाव प्रचार से जुड़ा हुआ है। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि TVK ने चुनाव के दौरान बच्चों को राजनीतिक संदेश का माध्यम बनाकर उनके माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के मतदान फैसले को प्रभावित करने की कोशिश की।

यह याचिका के.एस. गीता और अधिवक्ता एल. वासुकी की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चुनाव प्रचार में बच्चों की भागीदारी का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया गया, जो उचित नहीं है।

मद्रास हाईकोर्ट ने जताई चिंता

मामले की सुनवाई मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने की, जिसमें जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन शामिल थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि “बच्चों को राजनीतिक अपील का माध्यम बनाना सही नहीं है और इस तरह उन्हें चुनावी प्रक्रिया में शामिल कर माता-पिता को प्रभावित करने का प्रयास चिंताजनक है। कोर्ट ने TVK को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।”

24 अप्रैल की रैली से जुड़ा है विवाद

विवाद की जड़ 24 अप्रैल को चेन्नई के YMCA मैदान में आयोजित एक जनसभा को बताया जा रहा है। आरोप है कि इस सभा में विजय ने बच्चों से अपील की थी कि वे अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को मतदान के लिए प्रेरित करें। इसी बयान को आधार बनाकर याचिका दायर की गई है।

सिर्फ TVK ही नहीं, DMK और AIADMK पर भी आरोप

इस मामले में केवल TVK ही नहीं, बल्कि DMK और AIADMK पर भी चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, अदालत ने फिलहाल सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और मामले की जांच जारी है।

TVK ने अदालत में क्या कहा?

TVK की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस. मुरलीधर ने अदालत में दलील दी कि चुनाव आचार संहिता केवल चुनाव प्रक्रिया के दौरान लागू रहती है। उनका कहना था कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद चुनाव आयोग की भूमिका सीमित हो जाती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या चुनाव समाप्त होने के बाद चुनाव आयोग कथित उल्लंघनों की जांच कर सकता है।

अगली सुनवाई कब?

मद्रास हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को आठ सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को निर्धारित की गई है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत में आगे क्या रुख सामने आता है और इस मामले का राजनीतिक असर कितना व्यापक होता है।

Leave a Reply

What’s next

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading