जिस लिए अखिलेश यादव ने ताक पर रख दी अपनी राजनीति, उस दुष्कर्मी को हुई 8 साल की सजा
फाइल फोटो
उत्तर प्रदेश की राजनीति में रसूख रखने वाले और समाजवादी पार्टी के करीबी माने जाने वाले नवाब सिंह यादव को न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म और गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए सजा मुकर्रर कर दी है। कन्नौज न्यायालय का यह निर्णय न केवल एक आपराधिक मामले का पटाक्षेप है, बल्कि यह उन राजनीतिक दावों की भी कड़ी समीक्षा करता है जो महिला सुरक्षा और सामाजिक न्याय (PDA) के इर्द-गिर्द बुने जाते हैं।
प्रकरण की पृष्ठभूमि और न्यायिक प्रक्रिया
यह मामला अगस्त 2024 का है, जब जनपद कन्नौज में एक 15 वर्षीय नाबालिग के साथ दुष्कर्म के प्रयास की घटना ने प्रदेश को झकझोर दिया था। आरोपों के अनुसार, पूजा तोमर नामक महिला ने पीड़िता को नौकरी दिलाने का प्रलोभन देकर एक निजी कॉलेज परिसर में बुलाया था, जहाँ पूर्व सपा नेता नवाब सिंह यादव ने कथित रूप से मर्यादाओं को ताक पर रखकर पीड़िता के साथ दुर्व्यवहार किया। पुलिस की त्वरित छापेमारी के दौरान आरोपी को आपत्तिजनक स्थिति में हिरासत में लिया गया था।
साक्ष्यों और गवाहों के गहन परीक्षण के पश्चात, विशेष न्यायालय ने नवाब सिंह यादव और उसके भाई नीलू यादव को आठ-आठ वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, दोनों दोषियों पर दस-दस लाख रुपये का आर्थिक दंड भी आरोपित किया गया है।
DNA रिपोर्ट और राजनीतिक विरोधाभास
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे विवादास्पद मोड़ तब आया जब समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस मामले को राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मीडिया के समक्ष बार-बार DNA परीक्षण की वकालत की थी। हालांकि, वैज्ञानिक जांच के परिणाम राजनीतिक दावों के विपरीत निकले। DNA सैंपल का पीड़िता के नमूनों से मिलान होने के बाद बचाव पक्ष के तमाम तर्क निष्प्रभावी साबित हुए। यह स्थिति दर्शाती है कि जब गंभीर अपराधों में राजनीतिक संरक्षण देने का प्रयास किया जाता है, तो अंततः सत्य और न्याय की ही जीत होती है।
सांगठनिक संबंध और जवाबदेही
यद्यपि घटना के पश्चात समाजवादी पार्टी ने नवाब सिंह यादव से आधिकारिक दूरी बनाने का प्रयास किया, किंतु धरातल पर स्थितियां भिन्न प्रतीत होती थीं। नवाब सिंह यादव को क्षेत्र में ‘मिनी मुख्यमंत्री’ के रूप में जाना जाता था और उनकी सक्रियता सांसद डिंपल यादव के निर्वाचन क्षेत्र में अत्यंत प्रगाढ़ थी। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान राहुल गांधी और अखिलेश यादव के साथ साझा किए गए मंच और प्रचार सामग्री में उनकी उपस्थिति उनके सांगठनिक कद की पुष्टि करती है।
ऐसे में प्रश्न उठता है कि जो दल ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के सम्मान की बात करता है, क्या वह अपने ही दल के प्रभावशाली नेताओं द्वारा किए गए कृत्यों की नैतिक जिम्मेदारी लेगा?
