अखिलेश यादव का PDA मॉडल फेल? सपा की महिला जिलाध्यक्ष के साथ घर में घुसकर मारपीट
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव जो हर मंच से PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के हक और सम्मान की दुहाई देते हैं, आज अपनी ही पार्टी की एक महिला नेता के साथ हुई बर्बरता पर कटघरे में खड़े हैं। चंदौली में सपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष गार्गी सिंह पटेल के साथ उनके घर में घुसकर की गई मारपीट के वायरल वीडियो ने यूपी की सियासत में हलचल पैदा कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक विचलित करने वाले वीडियो में कुछ दबंगों को सपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष गार्गी सिंह पटेल के घर में घुसकर उनके साथ बेरहमी से मारपीट करते देखा जा सकता है। हैरानी की बात यह है कि गार्गी सिंह पटेल कोई साधारण कार्यकर्ता नहीं, बल्कि जिले की कद्दावर नेता हैं। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने अखिलेश यादव से मुलाकात की थी, जिसकी तस्वीरें अब इंटरनेट पर वायरल हैं।
अखिलेश यादव और डिंपल यादव की चुप्पी पर सवाल
अखिलेश यादव जो बच्चों को लैपटॉप बांटने से लेकर हर छोटे-बड़े मुद्दे पर ‘PDA’ का राग अलापते हैं, इस मामले में पूरी तरह मौन हैं। इस चुप्पी के पीछे का कारण राजनीतिक गलियारों में ‘वोटबैंक की राजनीति’ बताया जा रहा है।
- यादव वोटबैंक का डर? आरोप लग रहे हैं कि हमलावर यादव समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और सपा से जुड़े हुए हैं। चर्चा है कि अपने कोर वोटबैंक के नाराज होने के डर से अखिलेश यादव ने अपनी ही महिला नेता को बेसहारा छोड़ दिया है।
- डिंपल यादव का मौन: संसद में महिला आरक्षण और महिला सुरक्षा पर ओजस्वी भाषण देने वाली सांसद डिंपल यादव ने भी इस गंभीर मामले पर न तो कोई ट्वीट किया और न ही कोई बयान जारी किया। क्या महिला सम्मान सिर्फ भाषणों तक सीमित है?
पार्टी ऑफिस के बाहर भी महिलाओं से बदसलूकी!
मामला सिर्फ चंदौली तक सीमित नहीं है। पिछले दो दिनों से एक और वीडियो चर्चा में है जिसमें समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर दो महिला कार्यकर्ता वहां के गार्ड्स पर मारपीट और बदसलूकी का आरोप लगा रही हैं। एक कार्यकर्ता का दावा है कि उनके साथ मारपीट की गई और सीने पर मुक्का मारा गया। ये दोनों घटनाएं सपा के भीतर महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं।
IT सेल के जरिए ‘डैमेज कंट्रोल’ की कोशिश?
सूत्रों और सोशल मीडिया चर्चाओं के अनुसार, अखिलेश यादव ने इस मामले पर सीधा जवाब देने के बजाय अपनी पार्टी के IT सेल को सक्रिय कर दिया है। कोशिश यह की जा रही है कि किसी भी तरह इस मामले का ठीकरा भाजपा पर मढ़ दिया जाए, ताकि अखिलेश यादव को अपनी ही पार्टी के लोगों से जुड़े इस विवाद पर सफाई न देनी पड़े।
यह पूरा घटनाक्रम अखिलेश यादव की राजनीति पर गंभीर सवाल उठाता है। एक तरफ ‘PDA’ के नाम पर पिछड़ों और दलितों के सम्मान का दावा, और दूसरी तरफ अपनी ही पार्टी की पिछड़ी जाति की महिला नेता (पटेल) के साथ हुई हिंसा पर रहस्यमयी चुप्पी। क्या अखिलेश यादव के लिए महिला सम्मान से ऊपर उनका वोटबैंक है। गार्गी सिंह पटेल के साथ हुई इस घटना ने साबित कर दिया है कि जब राजनीति और मानवता के बीच चुनाव की बात आती है, तो विपक्ष के बड़े नेता अक्सर अपने ‘समीकरणों’ को सुरक्षित रखने में जुट जाते हैं।
