केरल में सत्ता मिलते ही कांग्रेस का ‘मुस्लिम कार्ड’: मुनम्बम के 600 हिंदू-ईसाई परिवार दांव पर, क्या वक्फ बोर्ड बनेगा नया मालिक?
केरल की सत्ता में वापसी करते ही कांग्रेस सरकार ने अपनी पुरानी नीतियों का परिचय देना शुरू कर दिया है। मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन कर सत्ता तक पहुँचने वाली वी.डी. सतीशन सरकार पर अब तुष्टिकरण और वक्फ बोर्ड की मदद करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
केरल के कोच्चि में स्थित मुनम्बम (Munambam) कस्बा आज एक गहरे संकट में है। यहाँ रहने वाले 600 से ज्यादा हिंदू और ईसाई परिवारों की रातों की नींद उड़ चुकी है। आरोप है कि कांग्रेस सरकार ने वक्फ बोर्ड और अपने मुस्लिम वोटबैंक को खुश करने के लिए इन परिवारों की 404 एकड़ जमीन को केंद्र सरकार के Umeed Portal पर वक्फ संपत्ति के रूप में रजिस्टर कर दिया है।
’10 मिनट’ वाला वादा और सतीशन का असली चेहरा
चुनावों के दौरान वी.डी. सतीशन ने जनता से वादा किया था कि यदि उनकी सरकार बनी, तो वह मुनम्बम जमीन विवाद को महज 10 मिनट में सुलझा देंगे। सरकार बनते ही उन्होंने यह कर दिखाया, लेकिन समाधान के नाम पर उन्होंने 600 परिवारों के भविष्य को ही दांव पर लगा दिया।
तंजिया अंदाज में: शायद सतीशन साहब ने सही कहा था, क्योंकि ‘Umeed’ पोर्टल पर किसी प्रॉपर्टी को वक्फ की संपत्ति घोषित करने के लिए रजिस्ट्रेशन करने में शायद 10 मिनट का ही समय लगता है।
2400 लोगों के सिर से छीन जाएगी छत?
अगर एक परिवार में औसतन 4 सदस्य भी माने जाएं, तो कुल 2400 लोग इस फैसले से प्रभावित होंगे। कांग्रेस सरकार के इस कदम ने उन लोगों को बेघर होने की कगार पर खड़ा कर दिया है जो पीढ़ियों से उस जमीन पर रह रहे हैं।
मुनम्बम विवाद के मुख्य बिंदु:
- कुल विवादित जमीन: 404 एकड़।
- प्रभावित परिवार: 600+ (हिंदू और ईसाई समुदाय)।
- विरोध प्रदर्शन: स्थानीय लोग अपनी जमीन बचाने के लिए पिछले 413 दिनों से भूख हड़ताल और सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
- बीजेपी का रुख: बीजेपी ने इसे कांग्रेस की ‘सांप्रदायिक और वोटबैंक की राजनीति’ करार दिया है।
केरल हाई कोर्ट का रुख और वक्फ की ‘चालाकी’
आपको बता दें कि अक्टूबर 2025 में केरल हाई कोर्ट ने इस मामले में वक्फ बोर्ड के दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया था। कोर्ट ने इसे ‘जमीन हड़पने की तरकीब’ करार दिया था। हालांकि, वक्फ समर्थक इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए, जहाँ फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश पर स्टे लगा हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि जब मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, तब कांग्रेस सरकार ने आनन-फानन में इस जमीन को राष्ट्रीय रिकॉर्ड (Central Portal) में वक्फ की संपत्ति के रूप में दर्ज करवा दिया।
कांग्रेस बनाम बीजेपी: कौन है असली सांप्रदायिक?
एक तरफ कांग्रेस पार्टी बीजेपी पर सांप्रदायिकता का आरोप लगाती है, वहीं दूसरी तरफ वह वक्फ बोर्ड के माध्यम से गरीब परिवारों की जमीनों पर दावा ठोकने में मदद करती है।
- बीजेपी का पक्ष: बीजेपी सरकार ‘वक्फ संशोधन बिल’ (Waqf Amendment Bill) लाने की कोशिश कर रही है ताकि वक्फ बोर्ड की शक्तियों को नियंत्रित किया जा सके और किसी की भी संपत्ति को अवैध रूप से कब्जाने से रोका जा सके।
- कांग्रेस का पक्ष: सरकार में आते ही मुस्लिम वोटबैंक को साधने के लिए हिंदुओं और ईसाइयों के हितों की बलि चढ़ा देना।
निष्कर्ष
केरल की नई सरकार को अभी एक महीना भी नहीं हुआ है और उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं साफ कर दी हैं। मुनम्बम के लोग आज भी सड़कों पर हैं, उनकी भूख हड़ताल जारी है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि क्या अदालत इस ‘चोरी-छिपे’ किए गए रजिस्ट्रेशन पर संज्ञान लेती है या नहीं।
