Vishal Dadlani पर भड़का सोशल मीडिया, PM पर टिप्पणी और पाक पत्रकार संग फोटो पर विवाद
मनोरंजन डेस्क: बॉलीवुड कलाकारों के बयान और उनके विवादों का पुराना नाता रहा है। लेकिन जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा या देश के स्वाभिमान से जुड़ा हो, तो जनता की प्रतिक्रिया काफी तीखी हो जाती है। इन दिनों सोशल मीडिया पर मशहूर म्यूजिक कंपोजर और सिंगर विशाल ददलानी अपने किसी गाने की वजह से नहीं, बल्कि अपने एक राजनीतिक बयान और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर नेटिजन्स के निशाने पर हैं।
ट्विटर (X) और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर क्यों कुछ कलाकार देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की आलोचना करते हुए भाषाई मर्यादा भूल जाते हैं, जबकि दूसरी तरफ विवादित नैरेटिव का समर्थन करते दिखते हैं।

पीएम मोदी पर टिप्पणी और लंदन इवेंट का विवाद
हाल ही में विशाल ददलानी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई एक टिप्पणी पर सोशल मीडिया यूजर्स ने कड़ी आपत्ति जताई है। लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर लोगों में नाराजगी है।
इस विवाद के बीच विशाल ददलानी की लंदन के एक इवेंट की कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिसमें वह पाकिस्तानी मूल की जर्नलिस्ट सफीना खान के साथ बातचीत करते नजर आ रहे हैं। सफीना खान पर अतीत में भारत विरोधी प्रोपेगेंडा चलाने और तिरंगे के अपमान से जुड़े गंभीर आरोप लग चुके हैं। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘दोहरा मापदंड’ बता रहे हैं और पूछ रहे हैं कि भारत के प्रधानमंत्री का विरोध करने वाले कलाकार, भारत विरोधी रुख रखने वालों के साथ मंच साझा करने में सहज कैसे हो जाते हैं?

बॉक्स ऑफिस पर असफलता और फ्रस्ट्रेशन का आरोप?
सोशल मीडिया पर चल रही बहसों में कई यूजर्स का दावा है कि बॉलीवुड के एक खास धड़े में दिख रही यह कड़वाहट बॉक्स ऑफिस पर लगातार मिल रही असफलताओं का नतीजा है। जानकारों का मानना है कि अब दर्शक किसी भी तरह के नैरेटिव या प्रोपेगेंडा फिल्मों को नकार रहे हैं। जब फिल्में और प्रोजेक्ट्स उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रहे, तो उस हताशा को राजनीतिक बयानों के जरिए निकाला जा रहा है।
रियलिटी शो के ‘जज’ होने पर भी उठे सवाल
विशाल ददलानी लंबे समय से ‘इंडियन आइडल’ जैसे बड़े सिंगिग रियलिटी शोज में बतौर जज और मेंटॉर नजर आते रहे हैं। अब सोशल मीडिया पर लोग यह मांग भी उठा रहे हैं कि जो कलाकार सार्वजनिक मंचों पर मर्यादित आचरण नहीं रख सकते, क्या उन्हें देश के युवाओं और उभरते कलाकारों का ‘आइडल’ बने रहने का नैतिक अधिकार है?
जनता का एक बड़ा वर्ग अब ऐसे दोहरे रवैये को लेकर मुखर हो चुका है और इस पूरे इकोसिस्टम पर सवाल उठा रहा है।
