सीएम विजय ने नहीं मानी पीएम मोदी की बात, लोगों ने जमकर किया ट्रोल

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एक तरफ देश में बढ़ती तेल कीमतों और वैश्विक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईंधन बचाने की अपील कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय अपने लंबे काफिले को लेकर सोशल मीडिया पर घिरते नजर आ रहे हैं। वायरल तस्वीरों के बाद विपक्षी राजनीति और वीआईपी कल्चर पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।

पीएम मोदी ने की थी ईंधन बचाने की अपील

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़े असर के कारण भारत में भी ईंधन संकट की आशंका जताई जा रही है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की थी।

पीएम मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने और फिजूल ईंधन खर्च से बचने की बात कही थी। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद भी उदाहरण पेश करते हुए अपने काफिले का आकार कम करने का फैसला लिया।

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने एसपीजी को निर्देश दिए थे कि जहां तक संभव हो, नई गाड़ियां खरीदने से बचा जाए और काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल किया जाए।

सीएम विजय के काफिले की तस्वीरें हुई वायरल

इसी बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के काफिले की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। बताया जा रहा है कि उनका काफिला अलग लेन से गुजरता है जबकि बाकी लेन पर सामान्य आवाजाही जारी रहती है।

हालांकि लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात पर गया कि मुख्यमंत्री का काफिला काफी लंबा दिखाई दे रहा है। ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि जब देश में ईंधन बचाने की बात हो रही है, तब इतना बड़ा काफिला क्यों?

सोशल मीडिया पर लोगों ने किया ट्रोल

वायरल तस्वीरों के बाद सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री विजय को लेकर कई तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

एक यूजर ने लिखा “इस मूर्ख को अब पेट्रोल की बर्बादी नजर नहीं आ रही।”

दूसरे यूजर ने टिप्पणी की “क्या उन्हें देश की जरा भी चिंता है?”

वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा “बेशर्म मुख्यमंत्री, सिर्फ सत्ता की भूख से ग्रस्त।”

इस तरह सोशल मीडिया पर कई लोगों ने मुख्यमंत्री विजय के काफिले को लेकर नाराजगी जाहिर की।

इससे पहले पीएम मोदी को लिख चुके हैं पत्र

बता दें कि इससे पहले मुख्यमंत्री विजय ने कपास कारोबारियों की समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा था कि कपास की बढ़ती कीमतों के कारण टेक्सटाइल उद्योग और इससे जुड़े लाखों मजदूरों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

अपने पत्र में विजय ने लिखा था कि, “यह कदम भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने, निर्यात बढ़ाने और रोजगार सुरक्षित करने में मदद करेगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो महीनों में कपास की कीमत 54,700 रुपये से बढ़कर 67,700 रुपये प्रति कैंडी (254 किलोग्राम) हो गई है, यानी करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से कपास पर लगने वाले 11 प्रतिशत आयात शुल्क को लेकर भी राहत देने की मांग की थी।

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