नशे के नाम पर Political Survey? पंजाब में ड्रग संकट के बीच शुरू हुआ “ड्रग जनगणना” पर विवाद

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Punjab: पंजाब, जिसे कभी देश का “अन्नदाता” कहा जाता था, आज गंभीर ड्रग संकट से जूझ रहा है। राज्य के कई इलाकों से युवाओं की ऐसी तस्वीरें सामने आती रही हैं, जिन्होंने पूरे देश को चिंता में डाल दिया है। AIIMS की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में लाखों लोग किसी न किसी रूप में नशे की चपेट में हैं।

इसी बीच पंजाब सरकार ने पहली बार “ड्रग और सामाजिक-आर्थिक जनगणना 2026” शुरू की, लेकिन अब यह सर्वे राजनीतिक विवादों में घिर गया है। आरोप लग रहे हैं कि नशे की समस्या का डेटा जुटाने के बजाय यह सर्वे AAP सरकार के लिए राजनीतिक फीडबैक लेने का माध्यम बन गया है।

पंजाब में ड्रग्स की गंभीर स्थिति

AIIMS की 2015 रिपोर्ट के मुताबिक:

पंजाब में करीब 2.3 लाख लोग ओपिओइड ड्रग्स जैसे हेरोइन और अफीम का सेवन करते पाए गए थे।
लाखों लोग शराब और अन्य नशों की लत से प्रभावित बताए गए।
कई क्षेत्रों में युवाओं की हालत को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है।

ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि सरकार ड्रग्स की जड़ तक पहुंचने के लिए गंभीर कदम उठाएगी।

“ड्रग सर्वे” या राजनीतिक फीडबैक?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार “ड्रग और सामाजिक-आर्थिक जनगणना 2026” में करीब 120 सवाल शामिल हैं। इनमें से लगभग 40 सवाल सीधे भगवंत मान सरकार की योजनाओं और कामकाज से जुड़े बताए जा रहे हैं।”

रिपोर्ट के मुताबिक लोगों से सवाल पूछे जा रहे हैं:

क्या आपको 24 घंटे बिजली मिलती है?
क्या भगवंत मान सरकार आने के बाद बिजली व्यवस्था बेहतर हुई?
सरकार के “टॉप 5 काम” कौन से हैं?
सरकार को आगे किन मुद्दों पर काम करना चाहिए?

इसी को लेकर विपक्ष और कई शिक्षकों ने सवाल उठाए हैं।

शिक्षकों ने लगाए गंभीर आरोप

सर्वे में तैनात कुछ शिक्षकों ने दावा किया कि यह सर्वे ड्रग्स की समस्या से ज्यादा “वोटर्स के मूड” को समझने पर केंद्रित दिखाई देता है।

एक शिक्षक ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा

“शायद ही कोई परिवार खुले तौर पर स्वीकार करता है कि उनके घर में कोई नशा करता है। लेकिन हम सरकारी योजनाओं पर लोगों की प्रतिक्रिया जानने में 50-60 मिनट खर्च कर रहे हैं।”

एक अन्य शिक्षक ने आरोप लगाया

“यह असल में चुनाव से पहले का सर्वे है, जिसे AAP आने वाले चुनावों में इस्तेमाल कर सकती है।”

कुछ शिक्षकों का आरोप है कि कई जगह सर्वे करने वालों को योजनाओं का प्रचार करने के निर्देश भी दिए गए।

पंजाब सरकार की सफाई

विवाद बढ़ने के बाद पंजाब सरकार ने सफाई दी है।

ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के विशेष सचिव अमित तलवार ने कहा “योजनाओं से जुड़े सवाल इसलिए रखे गए हैं ताकि लोगों से सुझाव लेकर योजनाओं में सुधार किया जा सके।” उन्होंने यह भी कहा कि अतिरिक्त सवाल केवल उन्हीं लोगों से पूछे जाते हैं जो पहले सवालों का जवाब “हाँ” में देते हैं।

विपक्ष ने साधा निशाना

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस सर्वे को “चुनाव केंद्रित अभ्यास” बताया।

उन्होंने कहा “यह ड्रग जनगणना नहीं, बल्कि 2027 चुनाव से पहले जनता का मूड समझने और राजनीतिक स्थिति का आकलन करने की कोशिश है।”

पंजाब लंबे समय से ड्रग्स की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह सर्वे वास्तव में नशे की समस्या को समझने के लिए है? या फिर सरकार जनता का राजनीतिक फीडबैक जुटाने की कोशिश कर रही है? फिलहाल इस मुद्दे पर पंजाब की राजनीति गरमाई हुई है और आने वाले समय में यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।

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