रामपुर में ‘दिल्ली मॉडल’ दोहराने की साजिश? आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर एक्शन से क्यों घबराई सपा!
राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शनों और अराजकता की आंच अब उत्तर प्रदेश के रामपुर तक पहुंचती दिख रही है। रामपुर में आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की अवैध इमारतों पर प्रशासन के संभावित बुलडोजर एक्शन के खिलाफ सियासी ड्रामा शुरू हो चुका है। आरोप लग रहे हैं कि कार्रवाई रोकने के लिए दिल्ली के प्रदर्शनों की तर्ज पर रामपुर में भी भीड़ जुटाकर दबाव बनाने की साजिश रची जा रही है।
38 इमारतें बिना नक्शे के: 15 दिन का अल्टीमेटम
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के अनुसार, जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में बनी कुल 40 इमारतों में से 38 इमारतें पूरी तरह से गैर-कानूनी हैं। ये इमारतें बिना किसी स्वीकृत नक्शे और प्रशासनिक इजाजत के तैयार की गई थीं।
प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को कड़ा रुख अपनाते हुए 15 दिन का अल्टीमेटम जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि या तो प्रबंधन खुद इन अवैध निर्माणों को हटाए, अन्यथा प्रशासन बुलडोजर चलाकर इन्हें ध्वस्त कर देगा।
अखिलेश यादव का डेलिगेशन और ‘छात्र हित’ का कार्ड
प्रशासन की इस नोटिस के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) पूरी तरह से आक्रामक रुख में आ गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी के सांसदों और विधायकों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पिछले तीन-चार दिनों से रामपुर में डेरा डाले हुए है। यह डेलिगेशन लगातार जिला प्रशासन के अधिकारियों पर कार्रवाई रोकने का दबाव बना रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि समाजवादी पार्टी अवैध कब्जों और नियमों के उल्लंघन को ‘छात्र हित’ का चोला पहनाकर बचाने की कोशिश कर रही है।
जंतर-मंतर वाला दंगाई मॉडल दोहराने की कोशिश?
दिल्ली के जंतर-मंतर और सड़कों पर जिस तरह उपद्रवियों ने तांडव मचाया था—पुलिसकर्मियों पर हमले किए गए और आम नागरिकों को बंधक बनाया गया—उसी मॉडल को रामपुर में लागू करने की आशंका जताई जा रही है।
यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर अचानक भीड़ इकट्ठा की जा रही है और माहौल को तनावपूर्ण बनाने का प्रयास हो रहा है। आरोप है कि निर्दोष छात्रों को ढाल बनाकर आगे किया जा रहा है, ताकि प्रशासनिक कार्रवाई होने पर ‘छात्रों पर अत्याचार’ का विक्टिम कार्ड खेला जा सके।
योगी सरकार का सख्त रुख: कानून का राज या ब्लैकमेलिंग?
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार अपने सख्त फैसलों और अवैध निर्माणों पर ‘बुलडोजर कार्रवाई’ के लिए जानी जाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस और प्रशासन को सख्त हिदायत दी है कि सरकारी काम में बाधा डालने या कानून हाथ में लेने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए और सीधे जेल भेजा जाए। यह सवाल भी उठ रहा है कि जब देश के एक आम नागरिक को मकान बनाने के लिए एक-एक नक्शा पास कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, तो फिर आजम खान की यूनिवर्सिटी को नियम-कायदों में छूट क्यों मिलनी चाहिए?
अगर आज भीड़ के दबाव में आकर प्रशासन अपने कदम पीछे खींचता है, तो इससे देश भर में अवैध कब्जाधारियों और उपद्रवियों के हौसले बुलंद होंगे। यूपी सरकार का संदेश साफ है कानून सबके लिए बराबर है और उपद्रवियों के आगे न सरकार झुकेगी, न कार्रवाई रुकेगी।
