NTA पेपर लीक के बहाने दिल्ली को सुलगाने की साजिश? ‘संसद चलो’ आंदोलन के पीछे ‘विदेशी टूलकिट’ का सनसनीखेज दावा
देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर बड़े पैमाने पर अशांति, हिंसा और अराजकता फैलाने की एक खौफनाक साजिश का दावा किया जा रहा है। NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) के पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ छात्रों के गुस्से को ढाल बनाकर दिल्ली की सड़कों को रणक्षेत्र में बदलने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। 20 जुलाई यानी आज आयोजित ‘संसद चलो’ आंदोलन के पीछे छात्र संगठनों—विशेषकर SFI और AISA—का नाम आगे कर एक बहुत बड़ा जाल बुना गया है, जिसे सुरक्षा एजेंसियां एक सामान्य छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि एक खतरनाक सुनियोजित साजिश के रूप में देख रही हैं।
‘नोएडा लेबर प्रोटेस्ट 2.0’: छात्रों के कंधे पर मजदूरों की बंदूक?
इस विरोध प्रदर्शन के पैटर्न को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह कोई आम जनआंदोलन नहीं है, बल्कि “नोएडा लेबर प्रोटेस्ट 2.0” का एक भयावह रूप है। सूत्रों के मुताबिक, यह एक ऐसा खतरनाक ‘डबल-ट्रैक प्लान’ है जिसके तहत मासूम छात्रों के जायज गुस्से का इस्तेमाल करके फैक्ट्रियों के आक्रामक मजदूरों और कट्टरपंथी यूनियनों को दिल्ली की सड़कों पर उतारने की रणनीति बनाई गई। इस लामबंदी के लिए बकायदा सोशल मीडिया चैनलों, व्हाट्सएप ग्रुपों, टेलीग्राम और सीक्रेट क्यूआर कोड्स (QR Codes) के जरिए गुप्त तरीके से भीड़ जुटाई जा रही है।
HKS सुरजीत भवन और ‘ट्रोजन हॉर्स’ की थ्योरी
इस कथित साजिश की शुरुआत संसद घेराव से ठीक 24 घंटे पहले, यानी 19 जुलाई को नई दिल्ली के HKS सुरजीत भवन से हुई। वहां “द कारवां” नाम के संगठन ने एक कन्वेंशन का आयोजन किया था। देखने में यह कार्यक्रम मजदूर अधिकारों और सरकारी दमन पर एक सामान्य सेमिनार जैसा लग रहा था, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि यह एक ‘ट्रोजन हॉर्स’ (Trojan Horse) की तरह था। इसका असली मकसद नोएडा और गुरुग्राम के औद्योगिक इलाकों से आक्रामक प्रदर्शनकारियों को दिल्ली के भीतर सुरक्षित तरीके से एंट्री दिलाना था।
महत्वपूर्ण तथ्य: इस कन्वेंशन के पीछे उसी संगठन का हाथ होने का संदेह है, जिसके कई कार्यकर्ताओं को पूर्व में नोएडा पुलिस ने हिंसक प्रदर्शनों के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया था। इस लामबंदी को कानून और मीडिया के सामने सही ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और निवेदिता मेनन जैसी हस्तियों का सहारा लिया जा रहा है। साथ ही, इसके तार हर्ष मंदर के ‘कारवां-ए-मोहब्बत’ से भी जुड़े होने की आशंका जताई गई है।
चीनी राजदूत से ‘सीक्रेट मीटिंग’ और विदेशी दखल का आरोप
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू इसमें विदेशी ताकतों का कथित दखल है। खुफिया इनपुट्स और मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया जा रहा है कि CPIM के वरिष्ठ नेताओं और लेफ्ट विंग के छात्र नेताओं ने भारत में मौजूद चीनी राजदूत शू फेइहॉन्ग से एक गुप्त मुलाकात की है। एक तरफ देश की संसद को घेरने की योजना और दूसरी तरफ चीनी दूतावास के अधिकारियों के साथ वामपंथी नेताओं की यह बैठक भारत की संप्रभुता पर सीधे हमले के रूप में देखी जा रही है।
जॉर्ज सोरोस और सोनम वांगचुक का कनेक्शन?
साजिश के तार सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सरकारों को पलटने के लिए बदनाम अरबपति जॉर्ज सोरोस से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। इस आंदोलन में जनता की सहानुभूति बटोरने के लिए सोनम वांगचुक के चेहरे का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आ रही है।
जांच में यह बात भी उजागर हुई है कि वांगचुक के संगठन ‘SECMOL’ को ‘DanChurchAid’ नामक अंतरराष्ट्रीय संस्था से भारी फंडिंग मिलती है, जिसे सीधे तौर पर जॉर्ज सोरोस का ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन्स’ फंड करता है। गृह मंत्रालय द्वारा नियमों के उल्लंघन और राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर SECMOL का FCRA लाइसेंस पहले ही रद्द किया जा चुका है। इसके अलावा, उनके दूसरे संगठन HIAL के खिलाफ भी CBI की जांच चल रही है, जहां NGO के करीब ₹6.5 करोड़ सीधे वांगचुक की निजी कंपनी ‘शेषयोन इनोवेशन्स’ में डायवर्ट करने के आरोप हैं।
दुबई से क्रिप्टो पेमेंट्स और सोशल मीडिया टूलकिट
इस कथित भारत-विरोधी नैरेटिव को फैलाने के लिए पैसे को पानी की तरह बहाए जाने का दावा किया जा रहा है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और बॉलीवुड के कुछ कलाकारों को इस प्रोपेगैंडा को हवा देने के लिए ₹50-50 हजार के ऑफर्स दिए गए हैं। मनी ट्रेल और खुफिया एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए कैश या बैंक ट्रांसफर के बजाय दुबई की एक PR कंपनी के जरिए क्रिप्टोकरेंसी में पेमेंट्स किए जा रहे हैं।
दिल्ली की DigiWhistle, मुंबई की Monk Entertainment और बेंगलुरु की ‘सर्किट आर्टिस्ट नेटवर्क’ जैसी डिजिटल एजेंसियां इस टूलकिट को प्रमोट करने में जुटी हैं। सुरक्षा व्यवस्था को और चुनौती देने के लिए भीमा कोरेगांव मामले के आरोपी और जमानत पर बाहर चल रहे सुधीर धवाले को भी इस मोबिलाइजेशन में सक्रिय किया गया है।
देशव्यापी ‘मिनी प्रोटेस्ट’ और राजनीतिक शह
वामपंथी छात्र संगठनों ने सुरक्षा एजेंसियों के ‘ग्राउंड रिएक्शन टाइम’ को जांचने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में 12-15 लोगों की छोटी टुकड़ियां बनाकर ‘मिनी प्रोटेस्ट’ की रणनीति अपनाई है। ओडिशा जैसे राज्यों में, जहां हाल ही में नई सरकार बनी है, वहां भी युवाओं को टेलीग्राम और डिस्कॉर्ड सर्वर्स के जरिए भड़काया जा रहा है।
इस पूरे नैरेटिव को पिछले दरवाजे से राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है, जिसमें समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज और कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के कार्यकर्ताओं की सक्रियता देखी गई है। अब देखना यह होगा कि सुरक्षा एजेंसियां देश की राजधानी को अराजकता की आग में झोंकने की इस कथित कोशिश से कैसे निपटती हैं।
