दिल्ली NEET प्रदर्शन का सच: ‘लोकतांत्रिक आंदोलन’ के नाम पर राजधानी को दहलाने की साजिश? लीक व्हाट्सएप चैट्स से हुआ बड़ा खुलासा
दिल्ली में NEET पेपर लीक और युवाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दे को लेकर हाल ही में एक बड़े प्रदर्शन का एलान किया गया था। जंतर-मंतर से संसद मार्च के नाम पर देश भर से बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं को दिल्ली बुलाया गया। लेकिन अब इस पूरे प्रदर्शन के पीछे छिपी एक बेहद खतरनाक और गंदी हकीकत सामने आ चुकी है।
जिस प्रदर्शन को ‘लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन’ का नाम देकर देश को गुमराह किया जा रहा था, वह असल में देश की राजधानी को दहलाने, कानून-व्यवस्था को ठप करने और एक चुनी हुई सरकार को वैश्विक स्तर पर बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश थी। संसद मार्च के नाम पर जो ड्रामा रचा गया, उसकी एक-एक परत और उसकी स्क्रिप्ट हफ्तों पहले ही तैयार कर ली गई थी। दिल्ली की अमन-शांति को आग लगाने और अराजकता का नंगा नाच करने की यह पटकथा बंद कमरों में लिखी गई, जिसके पुख्ता सबूत अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
जंतर-मंतर पर नाकामी के बाद चली गई ‘घटिया चाल’
शुरुआती योजना के मुताबिक, जब इस तथाकथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन का एलान जंतर-मंतर के लिए हुआ, तो आयोजकों को उम्मीद थी कि हजारों की भीड़ उमड़ेगी। लेकिन जब इस राजनीतिक प्रदर्शन में कोई नहीं पहुंचा और मैदान खाली रह गया, तो इन साजिशकर्ताओं ने एक घटिया चाल चली। सीधे रास्ते से भीड़ न जुटती देख, इन्होंने संसद सत्र के ठीक पहले दिन ‘संसद चलो’ मार्च का एलान कर दिया ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा जा सके।
इस गंदी राजनीति को हवा देने का काम वामपंथ के सबसे बड़े गढ़ JNU (जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी) के कुछ तत्वों ने किया। दिल्ली का माहौल बिगाड़ने के लिए सीधे तौर पर मासूम युवाओं को मोहरा बनाया गया। युवाओं को भड़काने और उन्हें कानून तोड़ने के लिए उकसाने के मकसद से धड़ाधड़ कई व्हाट्सएप ग्रुप्स में भड़काऊ संदेश भेजे गए।
‘चलो संसद’ व्हाट्सएप ग्रुप का पर्दाफाश: क्या यह ‘फिदायीन’ मानसिकता है?
कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च से ठीक पहले उनके सबसे सक्रिय व्हाट्सएप ग्रुप ‘चलो संसद’ में जो बातचीत हो रही थी, वह किसी भी संवेदनशील नागरिक का खून खौलाने के लिए काफी है। इस ग्रुप में खुलेआम युवाओं की भावनाओं से खेलते हुए लिखा जा रहा था:
“जो लोग अपनी जान तक देने को तैयार हैं, आपका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। आने वाली पीढ़ियां सुनेंगी कि मेरा भाई उस विरोध प्रदर्शन में शहीद हुआ, उस संघर्ष में शहीद हुआ।”

जरा सोचिए, क्या यह किसी लोकतांत्रिक आंदोलन की भाषा हो सकती है? क्या छात्रों के हक की लड़ाई में युवाओं को मरने के लिए उकसाया जाता है? यह भाषा साफ तौर पर युवाओं को सुरक्षाबलों से हिंसक टकराव के लिए तैयार करने का एक टूल थी।
साजिश का सबसे घिनौना चेहरा तब सामने आया जब इसी व्हाट्सएप ग्रुप के एक और मैसेज में लिखा गया: “अगर किसी की मौत होती है, तो सरकार पर ज्यादा प्रेशर बनेगा।”

इससे साफ है कि आंदोलन के कर्ताधर्ता खुद चाहते थे कि प्रदर्शन के दौरान किसी की मौत हो जाए, ताकि वे लाशों पर अपनी राजनीति की रोटियां सेक सकें। इन्हें युवाओं के भविष्य या उनकी जान से कोई सरोकार नहीं था। यह प्लानिंग काफी हद तक किसी उग्रवादी या फिदायीन हमले की रणनीति जैसी है, जहां अपने ही लोगों को मौत के मुंह में धकेल कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है।
दिल्ली पुलिस को चुनौती: इंटरनेट बंद होने पर ‘ऑफलाइन दंगों’ का सीक्रेट प्लान
इन साजिशकर्ताओं की बदमाशी सिर्फ लाशों की राजनीति तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि इन्होंने भारतीय संविधान और दिल्ली पुलिस को सीधे तौर पर चुनौती देने की तैयारी कर रखी थी। JNU के ‘संसद चलो मार्च’ से जुड़े जो अंदरूनी चैट्स लीक हुए हैं, उनमें पुलिस की सुरक्षा रणनीति को नाकाम करने का पूरा प्लान तैयार था।
चैट में प्रदर्शनकारियों को साफ निर्देश दिए गए थे:
“अगर दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर या संसद के आस-पास जैमर लगाती है या इंटरनेट बंद करती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सभी लोग अपने फोन में Briar, Bitchat और ऐसे ही दूसरे ब्लूटूथ मेश ऐप्स (Mesh Apps) डाउनलोड करके रखें, ताकि इंटरनेट न होने पर भी हम सब आपस में कनेक्टेड रहें।”

प्रशासन आमतौर पर इंटरनेट तब बंद करता है जब उसे किसी बड़ी अनहोनी या दंगे की आशंका को रोकना हो। लेकिन इन उपद्रवियों की तैयारी देखिए—अगर पुलिस इंटरनेट बंद भी कर दे, तो भी ब्लूटूथ तकनीक के जरिए संदेश भेजकर भीड़ को बैरिकेड्स तोड़ने और हिंसा भड़काने के निर्देश दिए जा सकें। यह किसी सामान्य छात्र आंदोलन की नहीं, बल्कि किसी शहर को बंधक बनाने वाले उग्रवादी गुट जैसी रणनीति है।
लोकतंत्र का मुखौटा या देशविरोधी साजिश?
जो भी तथ्य और स्क्रीनशॉट्स सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, वे साफ तौर पर गवाही दे रहे हैं कि कैसे छात्रों के मुद्दे का इस्तेमाल करके लोकतंत्र के मुखौटे के पीछे एक बहुत बड़ी, घिनौनी और देशविरोधी साजिश रची जा रही थी।
अब सवाल देश की जनता और युवाओं से है—क्या आप ऐसे तत्वों को कामयाब होने देंगे जो राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए देश के भविष्य को भड़का रहे हैं? क्या आप उन लोगों का साथ देंगे जो हमारी पुलिस और कानून व्यवस्था को तबाह करना चाहते हैं? इस सच्चाई को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना जरूरी है ताकि इन तथाकथित नेताओं और साजिशकर्ताओं का असली चेहरा देश के सामने आ सके।
