जंतर-मंतर पर हंगामा: संसद मार्च के दौरान पुलिस पर पथराव, दिल्ली को अस्थिर करने की बड़ी साजिश का आरोप
संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर बड़े तनाव की गवाह बनी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन की ओर कूच करने का प्रयास किया, जिसे रोकने पर प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। खबरों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की ओर से दिल्ली पुलिस पर जानबूझकर पथराव किया गया और सुरक्षा व्यवस्था को निशाना बनाया गया। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच देश में अस्थिरता पैदा करने की एक सुनियोजित साजिश की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सुनियोजित रणनीति या अचानक भड़का गुस्सा?
घटनाक्रम पर पैनी नजर रखने वाले जानकारों का मानना है कि यह कोई अचानक भड़का गुस्सा नहीं है, बल्कि एक प्री-प्लान्ड स्क्रिप्ट (सुनियोजित रणनीति) का हिस्सा है। आंदोलन की शुरुआत से ही इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि कुछ अराजक तत्व एक खास एजेंडे के तहत दिल्ली का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं। संसद मार्च के बहाने कानून-व्यवस्था को हाथ में लेना और सुरक्षाकर्मियों पर हमला करना यह साफ संकेत देता है कि इस पूरे फसाद की क्रोनोलॉजी बहुत पहले ही तैयार कर ली गई थी।
टूलकिट और विदेशी कनेक्शन के आरोप
इस आंदोलन के पीछे के असली मास्टरमाइंड और इसकी जड़ों को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों और हालिया घटनाक्रमों के मुताबिक, इस पूरे आंदोलन में एक खास ‘टूलकिट’ और विदेशी प्लानिंग के सक्रिय होने के आरोप लग रहे हैं। हाल ही में अमेरिका से लौटे कुछ तथाकथित कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी उंगली उठ रही है। उदाहरण के तौर पर, अभिजीत दिपके के भारत आते ही जिस तरह अचानक और आनन-फानन में इस बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया गया, उसने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। आरोप है कि प्रदर्शनकारी पिछले कई दिनों से ऐसे मौके तलाश रहे थे, जिससे पुलिस के साथ सीधी भिड़ंत हो सके और बाद में ‘विक्टिम कार्ड’ खेलकर सरकार को घेरा जा सके।
संयम के बाद पुलिस की कार्रवाई
तनावपूर्ण माहौल के बावजूद दिल्ली पुलिस लगातार संयम बरत रही थी ताकि राजधानी में कोई अप्रिय घटना या खून-खराबा न हो। लेकिन जब भीड़ बेकाबू हो गई और पथराव शुरू कर दिया, तो स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मजबूरन हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। हालांकि, सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिश की जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि यदि पुलिस सूझबूझ और मुस्तैदी न दिखाती, तो दिल्ली का माहौल पूरी तरह बिगड़ सकता था।
‘जेन-जी’ (Gen-Z) और युवाओं को भड़काने की साजिश
इस पूरे विवाद का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि देश के युवाओं, विशेषकर ‘जेन-जी’ (Gen-Z) को सोशल मीडिया के जरिए निशाना बनाया जा रहा है। भ्रामक नैरेटिव सेट करके युवाओं के जोश को गलत दिशा में मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाएं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव न जीत पाने वाले कुछ राजनीतिक तत्व अब सड़कों पर अराजकता फैलाकर चुनी हुई सरकार को कटघरे में खड़ा करना चाहते हैं। इनका मकसद देश के भीतर अशांति पैदा करना और वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को धूमिल करना है।
