खटीमा के कुटरी गांव में 70 थारू आदिवासियों की ‘घर वापसी’, हरेला पर्व पर वैदिक रीति से हुआ शुद्धिकरण यज्ञ

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उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के खटीमा क्षेत्र का छोटा-सा गांव कुटरी इस बार केवल हरेला पर्व के उत्सव के कारण नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सामाजिक और धार्मिक घटना की वजह से सुर्खियों में है। यहां थारू जनजाति के लगभग 70 ग्रामीणों ने स्वेच्छा से अपने मूल सनातन धर्म में वापसी की। हरेला पर्व के अवसर पर आयोजित वैदिक अनुष्ठान और शुद्धिकरण यज्ञ में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ समय पहले गांव के इन परिवारों का मतांतरण हो गया था। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने लालच और बहकावे के जरिए उन्हें अपने मूल धर्म से दूर कर दिया। जब इस घटना की जानकारी इलाके में फैली तो लोगों में नाराजगी देखने को मिली। मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की।

संवाद से निकला समाधान

ग्रामीणों का कहना है कि केवल कानूनी कार्रवाई से सामाजिक दूरी खत्म नहीं हो सकती थी। इसके बाद ग्राम प्रधान दीपा देवी ने पहल करते हुए प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद शुरू किया। इस अभियान में नरेंद्र सिंह, मनोहर पांडे और दीवान रावत सहित कई स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता भी उनके साथ जुड़े। इन लोगों ने परिवारों से उनकी सांस्कृतिक विरासत, पूर्वजों की परंपराओं और सामाजिक पहचान को लेकर विस्तार से चर्चा की। लगातार संवाद और समझाइश के बाद सभी परिवारों ने स्वेच्छा से अपने मूल धर्म में लौटने का निर्णय लिया।

हरेला पर्व पर हुआ वैदिक अनुष्ठान

हरेला पर्व के शुभ अवसर पर गांव में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य शुद्धिकरण यज्ञ आयोजित किया गया। पंडित हरीश जोशी और साधु मोहन गिरी के सानिध्य में संपन्न हुए इस अनुष्ठान में सभी प्रतिभागियों ने विधि-विधान के साथ हवन में आहुति दी। यज्ञ के बाद सभी ग्रामीणों की कलाइयों पर कलावा बांधा गया, चरणामृत ग्रहण कराया गया और वैदिक परंपरा के अनुसार उनकी घर वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई।

भावुक दिखे ग्रामीण, संस्कृति बचाने का लिया संकल्प

कार्यक्रम के दौरान कई ग्रामीण भावुक नजर आए। बुजुर्गों ने इसे अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने का अवसर बताया, जबकि युवाओं ने इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला कदम कहा।इस अवसर पर ग्राम प्रधान दीपा देवी ने कहा कि समाज को अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूक रहना होगा, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति बहकावे या लालच का शिकार न बने।

पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी घटना

खटीमा के कुटरी गांव की यह घटना अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। समर्थक इसे सांस्कृतिक पुनर्स्थापना का उदाहरण मान रहे हैं। वहीं, यह मामला धर्मांतरण और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे विषयों पर भी नई बहस को जन्म दे रहा है। ऐसे में कुटरी गांव की यह घटना केवल एक स्थानीय समाचार नहीं, बल्कि सामाजिक विमर्श का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।

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