G7 समिट में पीएम मोदी ने ट्रंप से मिलाया हाथ, लेकिन क्यों नहीं लगाया गले? जानिए इस ‘हैंडशेक’ के पीछे का बड़ा कूटनीतिक इशारा
जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन वैश्विक राजनीति की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने दुनिया भर के कूटनीतिक जानकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। सम्मेलन के इतर जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात हुई, तो दोनों नेताओं ने बेहद गर्मजोशी से हाथ मिलाया, लेकिन इस बार वो चिर-परिचित ‘जादू की झप्पी’ यानी गले मिलने वाला नजारा गायब था। सोशल मीडिया से लेकर इंटरनेशनल मीडिया तक अब इस बात के मायने तलाशे जा रहे हैं कि आखिर ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसे दौर की घनिष्ठता के बाद इस मुलाकात का टोन इतना औपचारिक क्यों था?
क्या बदल गया है कूटनीति का मिजाज?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह बॉडी लैंग्वेज बेहद सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद से अमेरिका की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और भारत के साथ व्यापारिक व टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच नए समीकरण बन रहे हैं। ऐसे में सिर्फ हाथ मिलाना और गले न मिलना यह संदेश देता है कि भारत अब अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को केवल व्यक्तिगत मित्रता के चश्मे से नहीं, बल्कि पूरी तरह से व्यावहारिक और राष्ट्रीय हितों (Pragmatic Diplomatic Relations) के आधार पर आगे बढ़ा रहा है।
ग्लोबल मंच पर भारत का कड़ा रुख
G7 समिट के इस मंच पर भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह वैश्विक महाशक्तियों के बीच संतुलन बनाने की कला में माहिर है। एक तरफ जहां रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे तनाव पर भारत का अपना स्वतंत्र रुख है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को भी उतनी ही तवज्जो दी जा रही है। पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की यह मुलाकात इस बात की तस्दीक करती है कि भारत अब किसी भी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर ‘जूनियर पार्टनर’ की तरह नहीं, बल्कि एक बराबर के वैश्विक खिलाड़ी की तरह टेबल पर बैठता है। यह हैंडशेक इस बात का प्रतीक है कि रिश्ते मजबूत हैं, लेकिन नियम अब दोनों तरफ से तय होंगे।
