वक्फ बोर्ड घोटाले की जांच की मांग! मुस्लिम धर्मगुरु ने योगी सरकार से की बड़ी अपील

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क्या वक्फ बोर्ड की जमीनों पर बड़ा घोटाला हुआ था? क्या समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान वक्फ की संपत्तियों का गलत इस्तेमाल हुआ? और आखिर क्यों एक प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु ने खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग कर दी है?

उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड की जमीनों को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। इस बार मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जांच की मांग किसी विपक्षी दल या बीजेपी नेता ने नहीं, बल्कि एक प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु ने की है।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शाहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान वक्फ बोर्ड की जमीनों में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि अगर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

मौलाना शाहाबुद्दीन रज़वी का आरोप है कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में वक्फ बोर्ड की कई कीमती संपत्तियों को कथित तौर पर बेहद कम कीमत पर लीज पर दिया गया या उनका गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वक्फ की संपत्तियों के प्रबंधन में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां हुईं।

इतना ही नहीं, उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि आज अखिलेश यादव राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर लगातार बयान दे रहे हैं, लेकिन जब उनकी सरकार थी, तब वक्फ बोर्ड में कथित तौर पर सबसे बड़े घोटाले हुए।

मौलाना रज़वी ने अपने आरोपों में समाजवादी पार्टी के अलग-अलग कार्यकालों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव 1989-91, 1993-95 और 2003-07 तक मुख्यमंत्री रहे, जबकि अखिलेश यादव ने 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश की कमान संभाली। उनका दावा है कि इन्हीं कार्यकालों में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों से जुड़े सबसे ज्यादा विवाद सामने आए।

इन आरोपों के दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान का भी नाम लिया। मौलाना का आरोप है कि समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान लंबे समय तक अल्पसंख्यक, वक्फ और हज विभाग की जिम्मेदारी आज़म खान के पास रही। उन्होंने दावा किया कि उसी दौरान अपनी पसंद के लोगों को सुन्नी वक्फ बोर्ड का चेयरमैन और सदस्य बनाया गया।

अब इस पूरे घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आलोचना अक्सर मुस्लिम संगठनों की ओर से होती रही है, उसी योगी सरकार से अब एक प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु वक्फ बोर्ड की कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

दूसरी ओर, जिस समाजवादी पार्टी को लंबे समय से मुस्लिम हितों की राजनीति करने वाली पार्टी माना जाता रहा है, उसी पर अब मुस्लिम समुदाय के एक प्रमुख धर्मगुरु वक्फ की संपत्तियों के कथित दुरुपयोग के आरोप लगा रहे हैं।

फिलहाल इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं यह देखना दिलचस्प होगा कि योगी सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती है और क्या वक्फ बोर्ड की कथित अनियमितताओं की जांच आगे बढ़ती है।

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