दुष्कर्म के आरोपी ज़ुबैर की मुठभेड़ में गिरफ्तारी, वायरल वीडियो के बीच फिर उठे राजनीतिक सवाल
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो… टांग में लगी गोली… और पुलिस के सहारे चलता एक आरोपी… लेकिन आखिर यह मामला क्या है? और क्यों इस घटना के साथ अब राजनीति भी जुड़ गई है?
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक के पैर में गोली लगी दिखाई दे रही है और पुलिस उसे सहारा देकर ले जा रही है। वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लेकिन जब पूरे मामले की जानकारी सामने आई, तो पता चला कि घायल व्यक्ति कोई आम शख्स नहीं, बल्कि दुष्कर्म के मामले का आरोपी है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के फतेहगंज पूर्वी थाना क्षेत्र के शिवपुरी गांव में रविवार सुबह पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार, दुष्कर्म के मामले में वांछित आरोपी ज़ुबैर को पकड़ने की कार्रवाई के दौरान उसके पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
बताया जा रहा है कि ज़ुबैर के खिलाफ एक युवती ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। पुलिस उसकी तलाश कर रही थी और इसी दौरान मुठभेड़ में उसे गिरफ्तार किया गया। फिलहाल आरोपी को इलाज के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए हिरासत में रखा गया है।
लेकिन इस घटना के बाद मामला केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर इसे लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई।
कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद (रावण) इस मामले पर चुप क्यों हैं। आलोचकों का आरोप है कि वे केवल चुनिंदा मामलों में ही मुखर होकर बयान देते हैं और बाकी मामलों में चुप्पी साध लेते हैं।
इसी संदर्भ में उत्तराखंड के टिहरी जिले के लंबगांव से जुड़े केतन मामले का भी जिक्र किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि उस मामले में आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप होने के बावजूद राजनीतिक प्रतिक्रिया अलग रही, जबकि बरेली की घटना पर वैसी सक्रियता नहीं दिखाई दे रही।
हालांकि, इन आरोपों और राजनीतिक टिप्पणियों पर भीम आर्मी या चंद्रशेखर आज़ाद की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बहरहाल, बरेली में दुष्कर्म के आरोपी ज़ुबैर की गिरफ्तारी और मुठभेड़ का वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहा है। वहीं इस घटना ने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और सार्वजनिक विमर्श को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।
