पिकनिक पॉलिटिक्स या पार्ट-टाइम जॉब? NEET संकट और पटना रैली के बीच 22 दिनों से कहाँ गायब हैं नेता विपक्ष राहुल गांधी!
भारत का लोकतंत्र आज अपने इतिहास के सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है; और इसकी एक बहुत बड़ी वजह है इस देश का दिशाहीन और पंगु विपक्ष। लोकतंत्र हमेशा दो पहियों पर चलता है एक सत्ता पक्ष और दूसरा मजबूत विपक्ष। लेकिन जब देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी की कमान ही एक ऐसे शख्स के हाथ में हो, जो राजनीति को लेकर रत्ती भर भी गंभीर न दिखे, तो लोकतांत्रिक संतुलन का डगमगाना तय है।
पार्ट-टाइम जॉब बनी सियासत?
कहने को तो राहुल गांधी लोकसभा में नेता विपक्ष (LoP) हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप से वे अपनी जिम्मेदारियों से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। ऐसा लगता है कि भारत की राजनीति राहुल गांधी के लिए बस एक पार्ट-टाइम जॉब बनकर रह गई है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि जब चुनाव होते हैं, तो वे पूरे दमखम के साथ मंचों पर दिखते हैं, लेकिन जैसे ही देश को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है, वे पूरी तरह से परिदृश्य से गायब हो जाते हैं। वे इस वक्त विदेश में हैं या देश में, इसका किसी को कोई ठोस आइडिया नहीं है। आज पूरा देश यही सवाल पूछ रहा है कि आखिर नेता विपक्ष कहां गायब हैं?
22 दिनों का रहस्य: गुप्त यात्रा पर उठते सवाल
रिकॉर्ड्स खंगालें तो बीते 22 दिनों में राहुल गांधी किसी भी सार्वजनिक गतिविधि में नजर नहीं आए हैं। न तो वे किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखे और न ही किसी राजनीतिक कार्यक्रम में। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी एक बार फिर किसी अज्ञात विदेश दौरे पर हैं।
यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इस यात्रा को इतना गुप्त क्यों रखा गया है? न तो कांग्रेस पार्टी ने उनकी यात्रा का कोई आधिकारिक शेड्यूल जारी किया और न ही राहुल गांधी ने खुद अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर देश की जनता को कोई अपडेट दिया। देश की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनका नेता विपक्ष इस वक्त कहाँ है और किस राष्ट्रीय या व्यक्तिगत काम से विदेश गया है। क्या सार्वजनिक जीवन में शीर्ष पद पर बैठे नेता की जनता के प्रति कोई जवाबदेही नहीं बनती?
मोदी बनाम राहुल
यदि एक तुलनात्मक नजरिया डालें, तो एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। पीएम मोदी जब भी किसी विदेश दौरे पर जाते हैं—चाहे वह कोई वैश्विक समिट हो या द्विपक्षीय वार्ता—उनके पल-पल की जानकारी, मुलाकातों की तस्वीरें और वीडियो देश की जनता के साथ तुरंत साझा की जाती हैं। देश के हर एक नागरिक को पता होता है कि उनका प्रधानमंत्री कहाँ और क्या कर रहा है।
लेकिन दूसरी तरफ हमारे मौजूदा नेता विपक्ष राहुल गांधी हैं, जिनकी राजनीति किसी ‘सीक्रेट मिशन’ जैसी नजर आती है। वे कब फ्लाइट पकड़ते हैं, विदेशों में किससे मिलते हैं, वहाँ क्या खिचड़ी पकती है—सब कुछ रहस्य के कोहरे में छिपा रहता है। लोकतंत्र में विपक्ष के पास भी जनता का ही जनादेश होता है, इसलिए उनके एक्टिविज्म और गतिविधियों की जानकारी भी देश को होनी चाहिए।
NEET संकट और पटना का रद्द दौरा: कार्यकर्ताओं में मायूसी
यह अनुपस्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब देश में NEET परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों में भारी आक्रोश है। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर कई राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों का आयोजन तो किया, लेकिन जब जमीन पर नेतृत्व करने की बारी आई, तो उनके शीर्ष नेता को अचानक विदेश में जरूरी काम याद आ गया।
हद तो तब हो गई जब बिहार की राजधानी पटना में 15 जुलाई को होने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम सिर्फ इसलिए स्थगित करना पड़ा क्योंकि राहुल गांधी देश में उपलब्ध नहीं हैं। भारत जैसे 140 करोड़ की आबादी वाले देश में राजनीति चौबीसों घंटे और सातों दिन का काम है, जहाँ आपको हर पल जनता के संघर्षों के साथ जुड़ना पड़ता है। लेकिन राहुल गांधी की इस कार्यशैली को अगर ‘पिकनिक पॉलिटिक्स’ कहा जाए, तो गलत नहीं होगा।
क्या राहुल गांधी को छोड़ देना चाहिए विपक्ष का पद?
जब भी देश में कोई गंभीर संकट आता है या सरकार के साथ किसी नीतिगत मुद्दे पर सीधे संवाद की जरूरत होती है, राहुल गांधी नदारद मिलते हैं। उनकी पार्टी के नेता संसद में चिल्लाते रहते हैं, सड़कों पर प्रदर्शन करते हैं, लेकिन उनका मुख्य सिपहसालार ही मैदान छोड़कर गायब रहता है।
भारतीय लोकतंत्र में सिर्फ सरकारों का चुनाव नहीं होता, यहाँ विपक्ष भी जनता द्वारा ही चुना जाता है और उनकी भी देश के प्रति उतनी ही जवाबदेही होती है। लेकिन राहुल गांधी लगातार अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटने के लिए घेरे जा रहे हैं। एक बार फिर ऐसा होते देख अब आम जनता से लेकर राजनीतिक गलियारों में यह आवाज उठने लगी है कि अगर राजनीति करने की इच्छा नहीं है, तो कांग्रेस नेता को अविलंब नेता विपक्ष का पद छोड़ देना चाहिए ताकि कोई गंभीर नेता इस भूमिका को निभा सके।
