NEET आंदोलन या राजनीतिक मंच? केजरीवाल की एंट्री से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर उठे नए सवाल

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जिस कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर मैंने शुरू से यह कहा कि ये आम आदमी पार्टी की B टीम है, आज उस बात का खुलासा हो गया। मानसून सत्र से पहले देश में बहुत बड़ा खुलासा हो चुका है और ये खुलासा किसी और ने नहीं, बल्कि ख़ुद अरविंद केजरीवाल ने किया है।

पिछले 24 दिनों से जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ़ से NEET पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। इस प्रदर्शन में शिक्षाविद सोनम वांगचुक भी शामिल हैं और पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। लेकिन अब इस पूरे आंदोलन ने एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है।

यहीं आया कहानी में ट्विस्ट

सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों में इस प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो वायरल हुए। दावा किया गया कि जिस आंदोलन को देशव्यापी बताया जा रहा है, वहां ज़मीन पर अपेक्षित भीड़ दिखाई नहीं दे रही। 22 मिलियन से ज़्यादा सोशल मीडिया फॉलोअर्स होने के बावजूद प्रदर्शन स्थल पर कुछ हज़ार लोग भी नज़र नहीं आए। भीड़ जुटाने को लेकर भी तरह-तरह के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए गए।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब ये है कि जिस कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर इसके संस्थापक अभिजीत दीपके लगातार कहते रहे कि यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है, यहाँ सिर्फ़ छात्रों और उनके अधिकारों की बात होगी, तो फिर अब इस मंच पर लगातार राजनीतिक चेहरे क्यों दिखाई दे रहे हैं?

अब केजरीवाल भी जंतर-मंतर पहुँचेंगे

करीब एक महीने से लगातार यह चर्चा चल रही थी कि यह आंदोलन धीरे-धीरे राजनीतिक रंग ले रहा है। अब इसी बीच खबर सामने आई कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में गुरुवार, 16 जुलाई को जंतर-मंतर पहुँचेंगे।

यहीं से इस पूरे आंदोलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई। क्योंकि जिस मंच को गैर-राजनीतिक बताया जा रहा था, उसी मंच पर अब राजनीतिक दलों के नेताओं की मौजूदगी लगातार बढ़ती जा रही है।

वांगचुक की भूख हड़ताल पर राजनीति तेज़

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर भी अब राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो चुकी है। जैसे-जैसे मानसून सत्र नज़दीक आया, वैसे-वैसे इस मुद्दे पर विपक्ष की सक्रियता भी बढ़ने लगी।

इसी बीच समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की। उनके ट्वीट के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर और तेज़ हो गया।

संसद मार्च की तैयारी और विपक्ष की सक्रियता

इस पूरे प्रदर्शन के दौरान कई ऐसे बयान भी सामने आए, जिनमें संसद तक मार्च निकालने की बात कही गई। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी मानसून सत्र को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए तीखे बयान दिए।

इधर प्रदर्शन स्थल पर अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े लोगों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

प्रकाश राज पहुँचे, नसीरुद्दीन शाह ने भी दी प्रतिक्रिया

इस बीच देश के दो चर्चित अभिनेता भी इस पूरे घटनाक्रम में चर्चा का हिस्सा बन गए।

अभिनेता प्रकाश राज ख़ुद जंतर-मंतर पहुँचकर प्रदर्शन में शामिल हुए, जबकि नसीरुद्दीन शाह ने सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की।

इन घटनाओं के बाद यह आंदोलन अब केवल NEET पेपर लीक तक सीमित नहीं दिखाई देता, बल्कि इसमें राजनीतिक और वैचारिक समूहों की सक्रिय भागीदारी भी साफ़ दिखाई देने लगी है।

NEET से शुरू हुआ आंदोलन, अब राजनीति केंद्र में?

कुल मिलाकर जिस आंदोलन की शुरुआत NEET पेपर लीक और छात्रों के भविष्य को लेकर हुई थी, अब उसमें विभिन्न राजनीतिक दलों, नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और फिल्मी हस्तियों की एंट्री हो चुकी है।

यही वजह है कि अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह आंदोलन अब भी केवल छात्रों के हितों तक सीमित है, या फिर यह पूरी तरह राजनीतिक मोर्चे में बदल चुका है।

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