क्या गुंडों के सहारे चलती थी ममता बनर्जी की सरकार? अग्निमित्रा पॉल के आरोपों से बंगाल की राजनीति गरमाई

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके बयानों के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।

अग्निमित्रा पॉल का आरोप

मीडिया से बातचीत के दौरान अग्निमित्रा पॉल ने दावा किया कि टीएमसी को 15 वर्षों तक शासन का मौका मिला, लेकिन इस दौरान सरकार कथित तौर पर गुंडों के सहारे चलाई गई। उन्होंने कहा कि बंगाल में पहले भी राजनीतिक हिंसा देखने को मिली है, लेकिन वर्तमान सरकार कानून-व्यवस्था और विकास पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि अब राज्य में गुंडागर्दी के लिए कोई जगह नहीं है और सरकार जनता के हित में काम कर रही है।

कल्याण बनर्जी के बयान पर भी साधा निशाना

अग्निमित्रा पॉल ने टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कल्याण बनर्जी किसे “गुंडा” कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्या यह टिप्पणी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, मंत्रियों, विधायकों या भाजपा नेताओं के लिए की गई है।

पॉल ने दावा किया कि जनता वर्तमान सरकार के कामकाज से संतुष्ट है और सरकार का पूरा ध्यान विकास कार्यों पर है।

टीएमसी में टूट का दावा

अग्निमित्रा पॉल ने यह भी दावा किया कि अब तृणमूल कांग्रेस पहले जैसी पार्टी नहीं रह गई है और वह कई गुटों में बंट चुकी है। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई को चाहे टीएमसी का कोई भी गुट कार्यक्रम आयोजित करे, भाजपा को उससे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन राज्य की जनता को 21 जुलाई 1993 की घटना की पूरी सच्चाई जानने का अधिकार है।

1993 की घटना की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने 1993 की घटना की जांच के लिए आयोग गठित करने और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने का वादा किया था, लेकिन आज तक वह रिपोर्ट सामने नहीं आई।

उन्होंने कहा कि यदि ममता बनर्जी वास्तव में 21 जुलाई के शहीदों को श्रद्धांजलि देना चाहती हैं तो सबसे पहले जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए।

‘शहीद दिवस’ रैली को लेकर सियासी घमासान

इस बीच 21 जुलाई को होने वाले टीएमसी के पारंपरिक ‘शहीद दिवस’ कार्यक्रम को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी टीएमसी ने कोलकाता के एस्प्लेनेड में रैली आयोजित करने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, कोलकाता पुलिस ने ट्रैफिक और भीड़भाड़ का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद टीएमसी ने राहत के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया है।

बागी गुट को मिली अनुमति

इसी बीच मामले ने नया राजनीतिक मोड़ तब लिया जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी के बागी गुट को एस्प्लेनेड स्थित गांधी प्रतिमा के पास अलग से ‘शहीद दिवस’ कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मिल गई। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक ओर टीएमसी अदालत के जरिए अनुमति हासिल करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के बागी गुट को कार्यक्रम की मंजूरी मिलना पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान की ओर इशारा माना जा रहा है।

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