ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लो का बड़ा बयान: ‘Asian Grooming Gangs’ नहीं, ‘Pakistani Muslim Rape Gangs’ कहिए

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ब्रिटेन… एक ऐसा देश जो खुद को कानून के शासन और मानवाधिकारों का पैरोकार बताता है। लेकिन अब वहीं से एक ऐसी बहस उठी है, जिसने पूरे यूरोप की राजनीति को झकझोर दिया है। जिस पाकिस्तान को कभी ब्रिटेन अपने सबसे करीबी साझेदारों में गिनता था, अब उसी पाकिस्तान का नाम ब्रिटिश संसद में गंभीर अपराधों के संदर्भ में लिया जा रहा है।

ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लो (Rupert Lowe) ने हाल ही में एक बयान देते हुए कहा कि ग्रूमिंग गैंग मामलों को “Asian Grooming Gangs” कहना गलत है। उनके मुताबिक, इन मामलों को “Pakistani Muslim Rape Gangs” कहा जाना चाहिए क्योंकि कई जांचों में आरोपियों की पृष्ठभूमि इसी समुदाय से जुड़ी पाई गई है।

उनका यह बयान अब ब्रिटेन में नई राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है।

क्या है ग्रूमिंग गैंग मामला?

ब्रिटेन में पिछले कई वर्षों से सामने आए Grooming Gang मामलों में कम उम्र की लड़कियों के यौन शोषण, मानव तस्करी और संगठित अपराध के गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं।

इन मामलों की जांच के लिए कई सरकारी और स्वतंत्र आयोग गठित किए गए। विभिन्न रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि कई मामलों में स्थानीय प्रशासन, पुलिस और अन्य सरकारी संस्थाएं समय रहते कार्रवाई करने में विफल रहीं, जिससे अपराध लंबे समय तक जारी रहे।

रूपर्ट लो ने क्या कहा?

रूपर्ट लो ने अपने बयान में कहा कि इन अपराधों को “Asian Grooming Gangs” कहना पूरे एशियाई समुदाय को बदनाम करता है।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध जांच रिपोर्टों और आंकड़ों के आधार पर जहां आरोपियों की पहचान स्पष्ट है, वहां उन्हें उसी पहचान के साथ संबोधित किया जाना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि “उन्हें Asian Grooming Gangs मत कहिए… सच्चाई यह है कि ये मुख्य रूप से Pakistani Muslim Rape Gangs हैं।”

उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।

स्वतंत्र रिपोर्टों का भी दिया हवाला

रूपर्ट लो ने अपने बयान में हाल ही में जारी एक स्वतंत्र रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि कई संगठित यौन शोषण मामलों में दोषी पाए गए लोगों का बड़ा हिस्सा पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम पुरुषों का था।

हालांकि विभिन्न जांच रिपोर्टों में अलग-अलग क्षेत्रों और मामलों के अनुसार आरोपियों की पृष्ठभूमि अलग रही है। इसलिए इस विषय पर ब्रिटेन में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस चलती रही है।

ब्रिटेन में फिर शुरू हुई बहस

रूपर्ट लो के बयान के बाद ब्रिटेन में एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि ऐसे अपराधों का वर्णन करते समय किस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

एक पक्ष का कहना है कि अपराधियों की वास्तविक पृष्ठभूमि छिपाने से समस्या का सही समाधान नहीं निकलता, जबकि दूसरे पक्ष का मानना है कि पूरे समुदाय को किसी अपराध से जोड़ना उचित नहीं है।

इसी मुद्दे पर अब ब्रिटेन की राजनीति, मीडिया और सामाजिक संगठनों के बीच नई बहस शुरू हो गई है।

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