CIA एजेंट बनकर इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री तक पहुंचा भारतीय कारोबारी? OCCRP रिपोर्ट में बड़ा दावा
एक बंद कमरा… कमरे में इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री बैठे हैं… सामने बैठा एक ऐसा शख्स, जो खुद को CIA एजेंट बताता है… और बातचीत हो रही है अरबों डॉलर की डिफेंस डील पर। सुनने में यह किसी हॉलीवुड फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन OCCRP और इंडोनेशियाई प्रकाशन Tempo की संयुक्त जांच में कुछ ऐसे ही दावे किए गए हैं।
मामला इंडोनेशिया के मौजूदा राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से जुड़ा है, जो वर्ष 2022 में देश के रक्षा मंत्री थे। जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय कारोबारी गौरव श्रीवास्तव ने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एजेंट बताकर इंडोनेशिया के शीर्ष अधिकारियों और रक्षा प्रतिष्ठान तक पहुंच बनाई।
OCCRP और Tempo की जांच में क्या दावा किया गया?
Organized Crime and Corruption Reporting Project (OCCRP) और इंडोनेशिया के मीडिया संस्थान Tempo की संयुक्त जांच के मुताबिक, गौरव श्रीवास्तव ने इंडोनेशिया के वरिष्ठ अधिकारियों और कारोबारी जगत के लोगों के बीच खुद को CIA से जुड़ा व्यक्ति बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, इसी पहचान के आधार पर उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री प्रबोवो सुबियांतो से करीबी संबंध बनाए और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई प्रस्तावित सौदों तक पहुंच हासिल कर ली।
प्रबोवो का भरोसा जीतने के लिए क्या किया?
जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गौरव श्रीवास्तव ने प्रबोवो सुबियांतो का विश्वास जीतने के लिए दो बड़े दावे किए।
पहला, उसने कहा कि वह 2002 के बाली बम धमाकों के फाइनेंसरों की जानकारी अपने कथित CIA संपर्कों के माध्यम से उपलब्ध करा सकता है।
दूसरा, उसने यह भी दावा किया कि वह अमेरिका द्वारा प्रबोवो सुबियांतो पर लगाए गए पुराने इमिग्रेशन प्रतिबंध हटवाने में मदद कर सकता है।
इन्हीं दावों के बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ने की बात जांच रिपोर्ट में कही गई है।
प्रबोवो के आवास तक पहुंचने का दावा
Tempo की रिपोर्ट के मुताबिक, डच ऑयल ट्रेडर नील्स ट्रोस्ट ने जांचकर्ताओं को बताया कि वर्ष 2022 के मध्य में वह गौरव श्रीवास्तव के साथ पश्चिम जावा स्थित गरुड़ यक्ष एस्टेट में प्रबोवो सुबियांतो के आवास गए थे।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि गौरव को प्रबोवो से जुड़ी कई ऐसी निजी जानकारियां थीं, जो सामान्य लोगों को उपलब्ध नहीं थीं।
किन रक्षा सौदों का जिक्र हुआ?
OCCRP-Tempo की जांच के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के बीच गौरव श्रीवास्तव के नियंत्रण वाली कंपनियों को इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय और सरकारी रक्षा कंपनी से पांच शुरुआती समझौते मिले।
इनमें तीन Letter of Intent (LOI), एक अतिरिक्त LOI और एक Memorandum of Understanding (MoU) शामिल था।
रिपोर्ट में जिन प्रस्तावित रक्षा परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- 36 F-15 लड़ाकू विमान
- UH-60 Black Hawk हेलीकॉप्टर
- C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट
- इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के लिए Joint Operations Command and Control Center
जांच में दावा किया गया है कि इन प्रस्तावित सौदों में जिन कंपनियों का इस्तेमाल हुआ, वे गौरव श्रीवास्तव के नियंत्रण वाली शेल कंपनियां थीं।
अमेरिका में भी दर्ज हैं मामले
रिपोर्ट के अनुसार, गौरव श्रीवास्तव पर अमेरिका में वर्ष 2024 से धोखाधड़ी समेत कई मामलों की जांच चल रही है।
यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित तौर पर प्राप्त धन का उपयोग लॉस एंजिलिस में लगभग 208 करोड़ रुपये मूल्य का एक आलीशान घर खरीदने में किया गया।
इंडोनेशिया सरकार ने क्या कहा?
इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रिको सिराइत ने कहा कि जिन रक्षा सौदों पर बातचीत हुई थी, वे अंतिम अनुबंध तक नहीं पहुंचे थे और कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ।
हालांकि OCCRP और Tempo की रिपोर्ट में इन घटनाओं को लेकर विस्तृत दावे किए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद गौरव श्रीवास्तव ने भी अपनी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपना पक्ष रखा है।
