पियूष पांडे: वह शख्स, जिसने विज्ञापनों को लोगों की भावनाओं से जोड़ दिया

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अगर आपसे पूछा जाए कि “कुछ खास है…”, “फेविकॉल का जोड़ है, टूटेगा नहीं” या “मिले सुर मेरा तुम्हारा” जैसी यादगार लाइनें किसने लिखीं, तो जवाब है-पियूष पांडे। भारतीय विज्ञापन जगत का यह नाम सिर्फ विज्ञापन लिखने के लिए नहीं, बल्कि लोगों के दिलों तक पहुंचने वाली कहानियां गढ़ने के लिए जाना जाता है।

1980 के दशक में बदली विज्ञापन की तस्वीर

1980 के दशक में भारत में ज्यादातर विज्ञापन सीधे-सादे और सिर्फ जानकारी देने वाले होते थे। उनमें भावनाएं कम और प्रचार ज्यादा होता था। ऐसे समय में पियूष पांडे ने विज्ञापन की दुनिया में कदम रखा। उनका मानना था कि अगर किसी विज्ञापन की भाषा आम लोगों की भाषा होगी, तो वह लोगों के दिलों तक जरूर पहुंचेगा। यही सोच उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती थी।

कैडबरी और फेविकॉल को दी नई पहचान

पियूष पांडे ने अपने करियर में कई ऐसे विज्ञापन बनाए, जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं। कैडबरी के लिए लिखा गया “कुछ खास है…” अभियान सिर्फ चॉकलेट का प्रचार नहीं था, बल्कि खुशियां बांटने का एहसास बन गया। वहीं फेविकॉल के विज्ञापनों ने एक साधारण उत्पाद को भी देशभर में अलग पहचान दिलाई। इन विज्ञापनों में भारतीय संस्कृति, हास्य और आम जिंदगी की झलक दिखाई देती थी, इसलिए लोग उनसे खुद को जोड़ पाते थे।

‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ और पोलियो अभियान

पियूष पांडे के सबसे यादगार अभियानों में “मिले सुर मेरा तुम्हारा” भी शामिल है। यह सिर्फ एक विज्ञापन नहीं था, बल्कि भारत की विविधता और एकता का संदेश देने वाला अभियान था। इसके अलावा, देश को पोलियो मुक्त बनाने के लिए चलाए गए जागरूकता अभियान में भी उनकी रचनात्मक सोच का अहम योगदान माना जाता है। सरल और असरदार संदेशों ने लोगों तक जरूरी जानकारी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

‘अबकी बार, मोदी सरकार’ का चर्चित नारा

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का नारा “अबकी बार, मोदी सरकार” पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। इस चुनावी अभियान की रचनात्मक रणनीति से पियूष पांडे का नाम भी जोड़ा जाता है। यह नारा इतना लोकप्रिय हुआ कि भारतीय चुनावी इतिहास के सबसे चर्चित नारों में शामिल हो गया।

पद्मश्री से हुआ सम्मानित

पियूष पांडे हमेशा कहते हैं कि अच्छा विज्ञापन वही होता है, जो लोगों की भाषा बोले और उनकी भावनाओं को समझे। इसी सोच ने उन्हें भारतीय विज्ञापन जगत का सबसे बड़ा नाम बना दिया। उनके बेहतरीन योगदान के लिए भारत सरकार ने साल 2016 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।

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