पीएम मोदी के मुरीद हुए नेतन्याहू: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को याद दिलाई भारत की ताकत, कहा- ‘हमारे साथ हैं 140 करोड़ भारतीय’

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आज बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत का रुतबा इस कदर बढ़ चुका है कि दुनिया की महाशक्तियां भी कूटनीतिक मंचों पर भारत के महत्व को खुलेआम स्वीकार कर रही हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान जैसी वैश्विक ताकतों के बीच जारी तनाव के बीच एक ऐसा वाकया सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया की जियोपॉलिटिक्स (भू-राजनीति) को हिलाकर रख दिया है। वाइट हाउस में अमेरिकी कूटनीति के अहंकार को आईना दिखाते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत और पीएम नरेंद्र मोदी के पक्ष में जो स्टैंड लिया, उसने वॉशिंगटन से लेकर न्यूयॉर्क तक सन्नाटा पसरा दिया है।

जेडी वेंस ने धौंस जमाने की कोशिश की

दरअसल, यह पूरा मामला पिछले महीने वाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग से शुरू हुआ। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल पर अपनी धौंस जमाने की कोशिश करते हुए एक बयान दिया था। वेंस ने कहा था कि, इजरायल को अमेरिका-ईरान शांति वार्ता का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि वाशिंगटन (अमेरिका) ही इजरायल का एकमात्र सबसे ताकतवर सहयोगी और रक्षक है।”

अमेरिका का यह रुख सीधे तौर पर इजरायल की स्वतंत्र विदेश नीति पर दबाव बनाने जैसा था। सुपरपावर होने के घमंड में अमेरिका को उम्मीद थी कि इजरायल हमेशा की तरह उसकी शर्तों के आगे झुक जाएगा, लेकिन इस बार इजरायली कमान बेंजामिन नेतन्याहू के हाथों में थी, जिन्होंने अमेरिका को उसके ही घर में करारा जवाब दिया।

नेतन्याहू का पलटवार: ‘हमारे पास…’

जेडी वेंस के इस बयान पर इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने बिना देर किए तीखा पलटवार किया। वेंस के दावों को खारिज करते हुए नेतन्याहू ने दोटूक कहा, “अमेरिकी उपराष्ट्रपति गलत बयानी कर रहे हैं। अमेरिका को यह गलतफहमी पालना छोड़ देना चाहिए कि वही हमारा इकलौता मददगार है। हमारे पास भारत का अटूट और ऐतिहासिक समर्थन है।”

नेतन्याहू यहीं नहीं रुके, उन्होंने भारत की जनसांख्यिकीय ताकत का लोहा मानते हुए आगे कहा, भारत में 1.4 अरब (140 करोड़) लोग रहते हैं और सच कहें तो, हमें वहां से जो जबरदस्त समर्थन मिलता है, उसकी तुलना दुनिया में किसी और से नहीं की जा सकती।”

एक तरफ दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य और आर्थिक महाशक्ति अमेरिका खड़ा था, और दूसरी तरफ इजरायल के प्रधानमंत्री ने खुले मंच से यह साफ कर दिया कि उन्हें किसी की धौंस मंजूर नहीं है, क्योंकि उनके साथ भारत और उसके 140 करोड़ नागरिकों की ताकत है।

बदलते वैश्विक समीकरण और भारत का बढ़ता रुतबा

इस कूटनीतिक टकराव ने ट्रंप प्रशासन और पूरी दुनिया को एक स्पष्ट संदेश दे दिया है कि आज के समय में भारत को नजरअंदाज करना किसी भी देश के लिए मुमकिन नहीं है। अब सवाल उठता है कि इजरायल जैसा आधुनिक और सैन्य रूप से आत्मनिर्भर देश भारत का इतना मुरीद क्यों है?

इसका सीधा जवाब है भारत की मजबूत, स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। भारत की कूटनीति का सबसे बड़ा हुनर यह है कि जहां एक तरफ अमेरिका और इजरायल की ईरान के साथ कट्टर दुश्मनी है, वहीं भारत के संबंध ईरान से भी बेहद मजबूत हैं और इजरायल से भी बेहद गहरे हैं। रूस और यूक्रेन युद्ध के दौरान भी पूरी दुनिया ने देखा कि कैसे पीएम नरेंद्र मोदी ने दोनों गुटों के बीच एक बेहतरीन कूटनीतिक संतुलन बनाए रखा। यही कारण है कि आज वैश्विक मंच पर कोई भी बड़ा फैसला भारत की सहमति के बिना अधूरा माना जाता है।

मोदी-नेतन्याहू की दोस्ती और डिफेंस का दम

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे मजबूत स्तंभ पीएम नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की बेमिसाल केमिस्ट्री है। यह महज दो देशों के राष्ट्राध्यक्षों का औपचारिक रिश्ता नहीं है, बल्कि एक ऐसा तालमेल है जिसने इतिहास की दिशा बदल दी है। पूर्व में भी ऐसे कई मौके आए हैं जब नेतन्याहू ने पीएम मोदी को दुनिया का सबसे प्रभावशाली और महान नेता स्वीकार किया है। इतिहास गवाह है कि कारगिल युद्ध से लेकर आधुनिक दौर तक, संकट के समय इजरायली हथियार हमेशा भारत के सबसे भरोसेमंद शस्त्र साबित हुए हैं। वहीं दूसरी ओर, जब भी इजरायल पर संकट आया, भारत ने भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में उसके रुख का खुलकर समर्थन किया।

नेतन्याहू के इस हालिया बयान ने अमेरिकी प्रशासन को यह अच्छी तरह समझा दिया है कि वैश्विक राजनीति में पीएम मोदी का ‘वेटेज’ और कद कितना बड़ा है। आज का ‘नया भारत’ किसी बाहरी महाशक्ति के दबाव में काम नहीं करता। वह दौर बीत चुका है जब अमेरिका पूरी दुनिया की नीतियों को तय करता था। आज का सच यह है कि इजरायल जैसे रणनीतिक रूप से बेहद कड़क देश भी अब अमेरिका को यह बताने से नहीं हिचकिचाते कि भारत की ताकत और उसकी दोस्ती उनके लिए सर्वोपरि है।

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