ममता बनर्जी को लगा तगड़ा झटका: कभी ‘काबा मदीना’ गाने वाली सायोनी घोष के बदले सुर, CM शुभेंदु अधिकारी की तारीफ में बांधे पुल!
पश्चिम बंगाल की सियासत में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही उथल-पुथल का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कभी सबसे आक्रामक और ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वाली नेता सायोनी घोष ने अब खुलकर बगावत के संकेत दे दिए हैं। ममता बनर्जी, जो कल तक खुद को बंगाल की अघोषित रानी समझती थीं, आज उनके पैरों के नीचे से राजनीतिक जमीन पूरी तरह खिसक चुकी है। सत्ता बदलते ही दीदी के सबसे खास और चहेते सिपहसालारों ने उनका साथ छोड़ना शुरू कर दिया है, जिसमें सायोनी घोष का नाम सबसे नया और चौंकाने वाला है। सांसद सायोनी घोष अब बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तारीफों के पुल बांध रही हैं और उनके साथ सीधे संवाद स्थापित कर रही हैं। राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि ममता की इस सबसे वफादार ‘शेरनी’ ने ही डूबते जहाज से छलांग लगा दी?
मुख्यमंत्री के काम को सराहा
राजनीति में दलबदल कोई नई बात नहीं है, लेकिन सायोनी घोष ने जो किया है, उसने ममता बनर्जी को खून के आंसू रोने पर मजबूर कर दिया है। टीएमसी से बागी तेवर अख्तियार करने के बाद लंबे समय से शांत बैठीं सायोनी घोष अचानक एक्टिव हो गई हैं। दिलचस्प बात यह है कि वह अब ‘दीदी’ के समर्थन में नहीं, बल्कि सीधे राज्य के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के एक्शन प्लान के समर्थन में खड़ी नजर आ रही हैं। हाल ही में दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में एक मासूम नाबालिग लड़की के साथ हुई घिनौनी और रूह कम कपा देने वाली वारदात पर सायोनी घोष ने चुप्पी तोड़ी। उन्होंने अपने ऑफिशियल एक्स (X) अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा:
“मैं इस घिनौनी घटना की कड़ी निंदा करती हूं। मैं पीड़िता और उसके परिवार के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ी हूं।”
लेकिन इस पोस्ट का जो अगला हिस्सा था, उसकी चर्चा अब पूरे देश के सियासी गलियारों में हो रही है। सायोनी ने सार्वजनिक रूप से बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से खुद इस मामले पर बात की है। उन्होंने मुख्यमंत्री की तारीफ करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से इस पूरे हालात की निगरानी कर रहे हैं, सरकार तुरंत एक्शन मोड में है, गिरफ्तारियां हो रही हैं और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी (SIT) का गठन भी कर दिया गया है।
‘काबा-मदीना’ से शुभेंदु के सुशासन तक का सफर
यह वही सायोनी घोष हैं जो कल तक ममता बनर्जी की गुड बुक्स में रहने के लिए मंचों से ‘काबा मदीना’ के गीत गाती थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्हें अच्छी तरह पता था कि अगर बंगाल में ममता बनर्जी के साथ रहना है और मलाई खानी है, तो तुष्टिकरण की घिनौनी राजनीति का हिस्सा बनना ही होगा। जब तक बंगाल में दीदी की तानाशाही सरकार थी, तब तक अपराधियों को खुला संरक्षण देना, कानून की धज्जियां उड़ाना और सिंडिकेट राज चलाना ही टीएमसी की पहचान बन चुका था। सायोनी घोष जैसी नेता भी इसी बहती गंगा में हाथ धो रही थीं। लेकिन जैसे ही बंगाल की जनता ने ममता बनर्जी के इस कुशासन को उखाड़ फेंका और सूबे की कमान शुभेंदु अधिकारी के हाथों में आई, वैसे ही इन बागी नेताओं के सुर रातों-रात बदल गए।
पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि सायोनी घोष का यह कदम ममता बनर्जी को एक सीधा और कड़ा अल्टीमेटम है। सायोनी ने साफ संदेश दे दिया है कि बंगाल में अब तुष्टिकरण और नफरत की राजनीति का ‘द एंड’ हो चुका है। जनता और नेताओं ने समझ लिया है कि अब दीदी के खोखले घमंड से इतर सिर्फ और सिर्फ काम की राजनीति होगी। बंगाल की कानून-व्यवस्था को लेकर अब कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
ममता बनर्जी का अहंकार और बिखरता कुनबा
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर ममता बनर्जी के सबसे वफादार और उनके सबसे करीबी लोग भी आज उनका साथ क्यों छोड़ रहे हैं? राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इसका सिर्फ और सिर्फ एक ही जवाब है कि ममता बनर्जी का सातवें आसमान पर पहुंचा अहंकार और उनका तानाशाही रवैया। ममता बनर्जी आज भी इस कड़वी हकीकत को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं कि बंगाल की जनता उन्हें पूरी तरह से सत्ता से बेदखल कर चुकी है। जब तक दीदी की कुर्सी सलामत थी, तब तक चाटुकारों की फौज उनके आगे-पीछे घूमती थी। लेकिन जैसे ही सत्ता हाथ से गई, ममता बनर्जी अपने ही घर में एकदम अलग-थलग पड़ गईं। ममता बनर्जी ने बंगाल को जिस हिंसा, बमबाजी और अराजकता की आग में झोंका था, आज उसी की आंच उनके खुद के कुनबे को भस्म कर रही है। उनके अपने ही सांसद और उनके अपने ही विधायक अब अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी की लीडरशिप पर थू-थू कर रहे हैं। सायोनी घोष के ये बागी तेवर इस बात का साफ संकेत हैं कि आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस का यह ताश का महल पूरी तरह जमींदोज होने वाला है।
